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'श्रीलंका में मेडिकल आपूर्ति की कमी' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अंतरराष्ट्रीय रेड क्रास के श्रीलंका में प्रमुख का कहना है कि तमिल विद्रोहियों और सरकारी सेनाओं के बीच संघर्ष वाले इलाक़े में काम कर रहे डॉक्टर थक चुके हैं. साथ ही इन इलाक़ों में बड़ी संख्या में घायलों के इलाज के लिए मेडिकल साजोसामान की कमी महसूस की जा रही है. उल्लेखनीय है कि लगभग 20 वर्ग किलोमीटर के इस इलाक़े में क़रीब एक लाख लोग फंसे हुए हैं. इन इलाक़ों में सेना पिछले कई महीनों से गोलाबारी कर रही है. अंतरराष्ट्रीय रेड क्रास के श्रीलंका में प्रमुख पॉल कास्टेला का कहना था कि इस इलाक़े में मेडिकल स्टॉफ बिना किसी अवकाश के रातदिन काम कर रहा है. उनका कहना था कि श्रीलंका सरकार ने अंतरराष्ट्रीय रेड क्रास को इस इलाक़े में जाने की अनुमति नहीं दी है. इसकी वजह से रेड क्रास गंभीर रूप से घायलों और बीमार लोगों को समुद्र के रास्ते से ही निकाल पा रहा है. इसके पहले संयुक्त राष्ट्र ने विद्रोहियों पर आरोप लगाया था कि तमिल विद्रोही लोगों को इस इलाक़े से जाने नहीं दे रहे हैं, हालांकि विद्रोहियों ने इस बात से इनकार किया था. ग़ौरतलब है कि वर्ष 1983 से श्रीलंका में तमिलों के लिए अलग राज्य की माँग और उसके लिए चल रहे तमिल विद्रोहियों के संघर्ष में लगभग 70 हज़ार लोग मारे गए हैं. |
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