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श्रीलंका: अंतरराष्ट्रीय समुदाय चिंतित | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ओर से श्रीलंका में युद्ध क्षेत्र में फंसे हुए लाखों नागरिकों को बचाने के लिए दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है. दुनिया के कई देशों ने श्रीलंका सेना और तमिल विद्रोही संगठन, एलटीटीई से कहा है कि युद्ध प्रभावित क्षेत्र से लोगों को निकलने दिया जाए और वहाँ जारी गोलीबारी को रोका जाए. देश के उत्तरी हिस्से में श्रीलंका की सेना और एलटीटीई लड़ाकों के बीच भीषण संघर्ष जारी है. इस इलाके में बड़ी तादाद में आम नागरिक भी फंसे हुए हैं. अमरीका ने इस बात पर चिंता व्यक्त की है कि उस इलाके में अभी तक दोनों ओर से गोलीबारी जारी है जहाँ बड़ी तादाद में आम नागरिक फंसे हुए हैं. वहीं युद्ध प्रभावितों की मदद कर रही संस्था, रेडक्रॉस ने देश के उत्तर में ताज़ा स्थिति को भयावह और त्रासद बताया है. आईसीआरसी के अभियानों के प्रमुख पिए क्रॉनबुल ने जिनीवा में कहा कि श्रीलंका में संघर्ष वाले इलाक़े लगातार घट रहे हैं मगर वहाँ पर अब भी दसियों हज़ार आम लोग फँसे हुए हैं. आरोप-प्रत्यारोप उन्होंने तमिल टाइगर विद्रोहियों पर आरोप लगाया कि वे लोगों को उन क्षेत्रों से निकलने नहीं दे रहे हैं जबकि सरकारी फ़ौजें चिकित्सा आपूर्ति पहुँचाने में बाधा डाल रही है.
मगर ब्रिटेन में श्रीलंका के राजदूत निहाल जयसिंघे ने रेड क्रॉस के इन आरोपों को पूरी तरह ख़ारिज कर दिया है. उन्होंने कहा कि सरकार को अभी संघर्ष विराम की घोषणा करने की कोई ज़रूरत नहीं है क्योंकि उनकी सेना आम लोगों को निशाना बनाते हुए गोलियाँ नहीं चला रही है. आईसीआरसी यूँ तो अफ़ग़ानिस्तान से लेकर दारफ़ुर और इराक़ तक में युद्ध क्षेत्रों में काम करता है मगर पिए क्रॉनबुल के मुताबिक़ उत्तरी श्रीलंका के संघर्ष वाले इलाक़ों में फँसे लोगों के हालात बिल्कुल अलग हैं और स्थिति आपदा वाली है. वहाँ संघर्ष वाला इलाक़ा अब घटकर 12 वर्ग किलोमीटर रह गया है. स्थिति के बारे में क्रानबुल ने कहा, "मुझे याद नहीं आता कि इतनी कम जगह में मैंने इतने ज़्यादा लोगों को फँसे देखा हो और वो भी इन हालात में जहाँ उनके पास सुरक्षा पाने की उम्मीद भी बहुत ही कम है." तकलीफ़देह स्थिति
फँसे हुए लोगों में रेड क्रॉस के भी 80 लोग हैं और उन लोगों ने बताया है कि पिछले कुछ दिनों में सैकड़ों आम लोग मारे गए हैं. इसके अलावा वहाँ लगभग एक हज़ार लोग गंभीर रूप से घायल हैं जिन्हें तुरंत उस क्षेत्र से बाहर निकालने की ज़रूरत है. आईसीआरसी का कहना है कि आम लोगों की मौत रोकने के लिए दोनों ही पक्षों को तुरन्त कुछ क़दम उठाने चाहिए. उनके मुताबिक़ तमिल विद्रोहियों को फँसे हुए लोगों को बाहर निकलने देना चाहिए और सरकार को उन लोगों तक राहत सामग्री पहुँचने देनी चाहिए. क्रॉनबुल चिकित्सा सामग्रियों के पहुँचने में हो रही अनावश्यक देर से चिंतित है और साथ ही उसके अनुसार श्रीलंका आ रहे रेड क्रॉस कर्मचारियों को वीज़ा मिलने में काफ़ी परेशानी हो रही है. 60 हज़ार से अधिक लोग संघर्ष वाला इलाक़ा छोड़कर भाग चुके हैं और माना जा रहा है कि उन इलाक़ों में तमिल विद्रोही अब अंतिम मोर्चा सँभाले हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें रेड क्रॉस श्रीलंका की स्थिति पर चिंतित21 अप्रैल, 2009 | भारत और पड़ोस 'तमिल क्षेत्र से 52 हज़ार आम लोग भागे'21 अप्रैल, 2009 | भारत और पड़ोस 'आम लोगों पर बमबारी कर रही है सेना'21 अप्रैल, 2009 | भारत और पड़ोस श्रीलंका में फँसे हज़ारों आम तमिल भागे20 अप्रैल, 2009 | भारत और पड़ोस 'श्रीलंका में मेडिकल आपूर्ति की कमी'19 अप्रैल, 2009 | भारत और पड़ोस 'सेना ने अभियान फिर शुरु किया'15 अप्रैल, 2009 | भारत और पड़ोस श्रीलंका में अस्थाई संघर्षविराम की घोषणा12 अप्रैल, 2009 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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