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श्रीलंका पर युद्ध रोकने का दबाव बढ़ा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका ने कहा है कि श्रीलंका में हज़ारों आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए वहाँ तत्काल युद्ध रोकने की ज़रूरत है. श्रीलंका के उत्तरी हिस्से में तमिल विद्रोही संगठन, एलटीटीई के साथ सेना के जारी संघर्ष में अभी भी हज़ारों की तादाद में लोग फंसे हुए हैं. व्हाइट हाउस की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि ओबामा प्रशासन श्रीलंका में युद्ध प्रभावित क्षेत्र में हो रहे अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार क़ानून के उल्लंघन को लेकर ख़ासा चिंतित है. व्हाइट हाउस ने तमिल विद्रोहियों और सेना के बीच संघर्ष के दौरान मारे जा रहे आम लोगों की लगातार बढ़ती तादाद पर भी चिंता जताई है. इससे पहले भारत ने श्रीलंका की सरकार से आम लोगों के युद्ध क्षेत्र में फंसे होने और हताहत होने को लेकर चिंता जताई और कहा कि सरकार वहाँ युद्ध रोके. भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन और विदेश सचिव शिव शंकर मेनन ने श्रीलंकाई राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे से मिलकर तमिल विद्रोहियों के साथ लड़ाई ख़त्म करने की अपील की. भारतीय प्रतिनिधियों ने लगभग डेढ़ घंटे तक चली बातचीत में लड़ाई को लेकर भारत की चिंताओं से राष्ट्रपति को अवगत कराया. भारत की चिंता भारत की ओर से चिंता की एक वजह यह भी है कि तमिल विद्रोहियों के साथ लड़ाई को भारतीय राज्य तमिलनाडु के राजनीतिक दलों ने बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाया है. इसी को देखते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने एमके नारायणन और शिव शंकर मेनन को श्रीलंका रवाना किया था. दोनों ने राजपक्षे के साथ बातचीत में उम्मीद जताई कि जल्दी ही कोई सकारात्मक नतीजा सामने आएगा.
एमके नारायणन ने जारी बयान में कहा, "हमने उत्तरी श्रीलंका की स्थिति पर भारत सरकार की चिंताओं से उन्हें अवगत कराया, ख़ास कर तमिल नागरिकों की मौतों को लेकर." पर भारत तमिल नागरिकों की चिंता के साथ यह भी दोहरा रहा है कि आम लोगों के मारे जाने को ध्यान में रखते हुए भी युद्ध को रोकने की ज़रूरत है. तमिल नागरिकों का मुद्दा इसलिए भी ख़ासा बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है क्योंकि भारत में आजकल आम चुनाव का समय है और राजनीतिक दल लोगों के बीच वोट मांग रहे हैं. दक्षिण भारत की राजनीति से तमिलों के सवाल और संवेदना को अलग करके नहीं देखा जा सकता है. जारी है युद्ध पर श्रीलंका सरकार की ओर से ऐसे संकेत नहीं है कि वे इस संघर्ष से इस वक़्त पीछे हटने की कोई मंशा भी रखते हैं. श्रीलंका सरकार ने विद्रोहियों के ख़िलाफ़ अभियान बंद करने से इनकार किया है. साथ ही श्रीलंका सरकार ने संयुक्त राष्ट्र की सहायता एजेंसियों को संघर्ष के क्षेत्र में जाने देने की अपील ठुकरा दी है. इसके पहले संयुक्त राष्ट्र ने तमिल विद्रोहियों और श्रीलंका सरकार से कहा था कि वे संघर्ष विराम करें ताकि फंसे हुए लोगों को निकाला जा सके और लोगों तक सहायता पहुँचाई जा सके. साथ ही संयुक्त राष्ट्र ने घोषणा की थी कि वह उत्तरी श्रीलंका में मानवीय दल भेज रहा है जहाँ श्रीलंकाई सेना और तमिल विद्रोहियों के संघर्ष में लगभग 50 हज़ार लोग फंसे हुए हैं. संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने गुरुवार को मानवीय दल तत्काल भेजने की घोषणा की थी. |
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