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टाइटलर और सज्जन कुमार के टिकट कटे | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
वर्ष 1984 के सिख विरोधी दंगों ने कांग्रेस के दो प्रमुख नेताओं जगदीश टाइटलर और सज्जन कुमार की लोकसभा सीटों के लिए दावेदारी ख़त्म कर दी है. कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता जनार्दन द्विवेदी ने कहा, ''कांग्रेस पार्टी ने टाइटलर और सज्जन कुमार के बारे में फ़ैसला किया है कि ये दोनों ही अगले चुनावों में पार्टी के उम्मीदवार नहीं होंगे.'' उनका कहना था, ''टाइटलर और सज्जन कुमार ने प्रेस कांफ्रेस कर के कहा कि वो चुनाव लड़कर पार्टी को शर्मिन्दा नहीं करना चाहते हैं. इससे राजनीतिक और सामाजिक समरसता को नुकसान हो रहा है. उन्होंने साफ किया कि वो इस संबंध में फ़ैसला पार्टी अध्यक्ष के हाथ में छोड़ रहे हैं और पार्टी नेतृत्व ने फ़ैसला किया कि वो अब पार्टी के उम्मीदवार नहीं होंगे.'' द्विवेदी का कहना था कि ये दोनों ही सांसद हैं और अगर ये खड़े होते तो भारी मतों से विजयी होते. हालांकि उन्होंने इन सवालों का जवाब नहीं दिया कि क्या पार्टी दबाव में दोनों नेताओं की उम्मीदवारी वापस ले रही है. उल्लेखनीय है कि जगदीश टाइटलर दिल्ली सदर और सज्जन कुमार बाहरी दिल्ली से सांसद हैं और परिसीमन के बाद टाइटलर पूर्वोत्तर दिल्ली और सज्जन कुमार दक्षिणी दिल्ली से उम्मीदवार थे. दिन भर की हलचल इससे पहले टाइटलर ने एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा था कि वो अपनी दावेदारी के लिए दबाव नहीं बनाएंगे और जो सोनिया गांधी का फ़ैसला होगा उसे मानेंगे. उनका कहना था, ''मुझे बार बार न्याय मिला है और मैं चुनाव जीता हूं लेकिन मीडिया ने मुझे बदनाम कर दिया. मैं पार्टी को शर्मिन्दा नहीं करना चाहता था.'' टाइटलर का कहना था कि एनडीए के शासनकाल में अकाली दल भी सत्ता में थी और इस दौरान भी कोर्ट से उन्हें बरी किया गया था. टाइटलर ने कहा कि उनके ख़िलाफ़ कोई केस नहीं है और सिर्फ़ एक हलफ़नामे में उनका नाम लिया गया है जिसकी जांच चल रही है. टाइटलर पर 1984 के सिख विरोधी दंगों में शामिल होने का आरोप था और पिछले दिनों सीबीआई ने उन्हें क्लीन चिट दे दी थी. इस संबंध में कोर्ट को गुरुवार को सुनवाई करनी थी लेकिन कोर्ट ने सुनवाई स्थगित कर दी है. टाइटलर का कहना था कि उन्हें किसी कांग्रेस नेता ने उम्मीदवारी से हटने के लिए नहीं कहा लेकिन वो पार्टी के हित में इस संबंध में फ़ैसला पार्टी के हाथ में सौंप रहे हैं हैं. टाइटलर मीडिया से बेहद नाराज़ दिखे और उनका कहना था, ''84 के दंगों में जो भी रिपोर्टें दाखिल हैं उसमें मेरा नाम तक नहीं हैं लेकिन मीडिया ने ऐसा प्रचार किया कि मैं दोषी हूं. पूरी दुनिया में ऐसा दुष्प्रचार किया गया है. मुझे कोर्ट ने कई बार बरी किया लेकिन मीडिया से मुझे कभी दोषमुक्त नहीं किया.'' टाइटलर ने यहां तक कहा कि उन्हें एनडीए के शासनकाल में भी क्लीन चिट दे दी गई थी. यह पूछे जाने पर कि सिखों का विरोध एक जनभावना नहीं है तो उनका कहना था कि वो बार बार चुनाव जीते हैं और उन्हें सिखों ने भी वोट दिया है. उल्लेखनीय है कि दो दिन पहले एक पत्रकार ने सिख विरोधी दंगों के मामले मे एक सवाल के जवाब से संतुष्ट न होने पर गृह मंत्री पी चिदंबरम पर जूता चला दिया था. इसके बाद से टाइटलर की उम्मीदवारी ने तूल पकड़ा जिसके बाद टाइटलर ने दावेदारी पर दबाव न बनाने की घोषणा की है. | इससे जुड़ी ख़बरें मेरा नाम कभी नहीं आया- टाइटलर08 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस सज्जन कुमार का ग्रामीण बोर्ड से इस्तीफ़ा 11 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस जगदीश बारह वर्ष बाद लौटा रफ़ीक बनकर14 जून, 2007 | भारत और पड़ोस कोर्ट ने टाली सुनवाई, कांग्रेस पर दबाव09 अप्रैल, 2009 | भारत और पड़ोस टाइटलर को सीबीआई ने दी क्लीन चिट02 अप्रैल, 2009 | भारत और पड़ोस 'पत्रकार नुक़सान नहीं पहुँचाना चाहता था'08 अप्रैल, 2009 | भारत और पड़ोस टाइटलर के ख़िलाफ़ पंजाब में प्रदर्शन08 अप्रैल, 2009 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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