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बांग्लादेश में विद्रोहियों की तलाश | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बांग्लादेश की सेना ने विद्रोह में हिस्सा लेनेवाले बांग्लादेश राइफ़ल्स (बीडीआर) के जवानों की तलाश का अभियान छेड़ दिया है. इस विद्रोह में बांग्लादेश सेना के लगभग 140 लोग मारे गए थे. बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना का कहना है कि ये विद्रोह सुनियोजित था और इसकी जाँच जारी है. उन्होंने बताया कि उन्होंने अमरीका की एफ़बीआई और ब्रिटेन के स्कॉटलैंड यार्ड से जाँच में मदद माँगी है. रविवार को बांग्लादेश की संसद में प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा कि बांग्लादेश राइफ़ल्स के लगभग 700 जवान हिरासत में हैं. उनका कहना था कि उन्होंने अमरीका के सहायक विदेश मंत्री रिचर्ड बाउचर और ब्रिटेन की स्कॉटलैंड यार्ड से संपर्क कर विद्रोह की जाँच में मदद का अनुरोध किया है. शेख हसीना का कहना था,'' मैंने रिचर्ड बाउचर से चर्चा की है. मैंने उनसे जाँच में एफ़बीआई की सहायता माँगी है.'' बांग्लादेश पुलिस का कहना है कि वो विद्रोह के सिलसिले में बांग्लादेश राइफ़ल्स के एक हज़ार से अधिक लोगों के ख़िलाफ़ मामला चलाया जाएगा. इसमें हथियारों और विस्फोटकों का इस्तेमाल कर अधिकारियों और आम लोगों की हत्या करने, अफ़रातफ़री फैलाने, लूटपाट और शवों को छुपाने के आरोप शामिल हैं. विद्रोह की शुरुआत राजधानी ढाका में हिंसा के इतने दिनों बाद भी सेना के 70 अधिकारियों का पता नहीं चल पा रहा है. उल्लेखनीय है कि शुरुआत में बांग्लादेश सरकार ने विद्रोह करने वालों को आम माफ़ी की पेशकश की थी लेकिन जब मारे गए लोगों की संख्या का असल आँकड़ा सामने आया तो सरकार ने कहा कि दोषियों को सज़ा दी जाएगी. बांग्लादेश बॉर्डर गार्ड लंबे समय से शिकायत करते आए हैं कि उन्हें सेना के जवानों के मुकाबले कम वेतन मिलता है. बांग्लादेश की राजधानी ढाका में 25 फ़रवरी को बांग्लादेश राइफ़ल्स के जवानों ने विद्रोह कर दिया था. इसके बाद सेना और बांग्लादेश राइफ़ल्स के जवानों के बीच भारी गोलीबारी हुई थी. बीडीआर के जवानों का सशस्त्र विद्रोह ढाका के बाहर 12 अन्य शहरों में फैल गया था. शुरुआत में कहा गया था कि वेतन, कामकाज का वातावरण और तरक्की के सवालों पर नाराज़ जवानों ने विद्रोह किया था. |
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