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बांग्लादेश में कई और क़ब्रें मिलीं | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बांग्लादेश में हुए विद्रोह में मारे गए सैनिक अधिकारियों के और क़ब्र मिले हैं. राजधानी ढाका के एक परिसर में तीन क़ब्र मिले हैं. अब भी 70 सैनिक अधिकारियों का कोई अता-पता नहीं है, जिनकी तलाश की जा रही है. विद्रोह में मारे गए लोगों की संख्या का पता नहीं चल पाया है. बीबीसी को बताया गया है कि 10 लोगों के शव मिले हैं, इनमें एक कमांडिंग ऑफ़िसर की पत्नी का शव भी शामिल है. कई शव इतनी बुरी तरह जले हुए हैं कि उन्हें पहचानना भी मुश्किल है. शुक्रवार को भी एक सामूहिक क़ब्र मिली थी. माना जा रहा है कि इस क़ब्र से 58 सैनिक अधिकारियों के शव बरामद हुए हैं. सेना ने बांग्लादेश राइफ़ल्स (बीडीआर) के विद्रोह में मारे गए लोगों का अंतिम संस्कार उस समय तक टाल दिया है, जब तक सभी लोगों के शव बरामद नहीं हो जाते. समर्थन इस बीच बांग्लादेश की सेना के प्रमुख मोइनुद्दीन अहमद ने पत्र भेजकर सरकार के प्रति समर्थन जताया है. बीच में ऐसी ख़बरें आ रही थी कि बांग्लादेश की सेना विद्रोह के निपटने के सरकार के तरीक़े से असंतुष्ट है. सरकार ने भी अब ये स्पष्ट किया है कि विद्रोह में शामिल उन लोगों को माफ़ी नहीं मिलेगी, जिन्होंने हत्याएँ की हैं. अभी तक 70 सैनिक अधिकारियों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई है. इन अधिकारियों की तलाश जारी है. एक अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि आग में से शरीर के हिस्से मिले हैं और डर यही है कि कहीं कई शवों को जला न दिया गया हो. उन्होंने बताया कि बीडीआर के कई जवान समर्पण करने से पहले ही वहाँ से भाग गए. बीडीआर मुख्यालय की चारदीवारी के पास से बड़ी संख्या में वर्दियाँ, जूते और हैलमेट मिले हैं. बीबीसी संवाददाता के मुताबिक़ माना जा रहा है कि या तो ये विद्रोहियों के सामान हैं या फिर उन लोगों के, जो इस विद्रोह से जुड़ना न चाहते हो. गिरफ़्तारी अभी तक कम से कम 200 संदिग्ध विद्रोहियों को गिरफ़्तार किया गया है. इन विद्रोहियों को उस समय पकड़ा गया जब वे सामान्य पोशाक में भागने की कोशिश कर रहे थे.
सेना में दूसरे नंबर के अधिकारी लेफ़्टिनेंट जनरल एमए मुबिन ने कहा है कि हत्यारों को सज़ा ज़रूर मिलेगी. समाचार एजेंसी एएफ़पी के मुताबिक़ एमए मुबिन ने टेलीविज़न संबोधन में कहा, "बीडीआर के जिन जवानों ने इस बर्बर काम को अंजाम दिया है, उन्हें माफ़ी नहीं दी जा सकती और न मिलेगी. इन लोगों को जल्द से जल्द सज़ा मिलेगी. जबकि शहीदों को राजकीय सम्मान के साथ दफ़नाया जाएगा." माना जाता है कि बीडीआर के जवानों ने वेतन और शर्तों को लेकर एकाएक विद्रोह कर दिया. हालाँकि कई अधिकारी ये भी मानते हैं कि योजनाबद्ध तरीक़े से विद्रोह हुआ. | इससे जुड़ी ख़बरें बांग्लादेशः विद्रोह में मरनेवालों की तादाद 140 हुई28 फ़रवरी, 2009 | भारत और पड़ोस बांग्लादेश में तीन दिनों का शोक27 फ़रवरी, 2009 | भारत और पड़ोस सैन्य अधिकारियों की सामूहिक कब्र मिली27 फ़रवरी, 2009 | भारत और पड़ोस बांग्लादेश में विद्रोह थमा, कई लापता26 फ़रवरी, 2009 | भारत और पड़ोस बांग्लादेश में विद्रोह फैला, सेना ने टैंक बुलाए26 फ़रवरी, 2009 | भारत और पड़ोस शेख़ हसीना ने जवानों को चेतावनी दी26 फ़रवरी, 2009 | भारत और पड़ोस विद्रोही जवानों को आम माफ़ी25 फ़रवरी, 2009 | भारत और पड़ोस ढाका में जवानों का विद्रोह25 फ़रवरी, 2009 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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