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श्रीलंका: युद्ध रोकने की अंतरराष्ट्रीय अपील | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
यूरोपीय यूनियन और संयुक्त राष्ट्र ने श्रीलंका में सरकार और तमिल विद्रोहियों के बीच तत्काल संघर्षविराम की अपील की है. यूरोपीय यूनियन ने कहा है कि दोनों पक्षों को श्रीलंका के उत्तरी क्षेत्र में तमिल विद्रोहियों के कब्ज़े वाले युद्ध क्षेत्र से आम नागरिकों को बाहर जाने देना चाहिए. संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय युद्ध क्षेत्र से आम नागरिकों को निकालने के लिए संघर्षविराम का ज़ोरशोर से समर्थन करेगा. 'हथियार नहीं डालेंगे' सोमवार को श्रीलंका में तमिल विद्रोहियों ने संयुक्त राष्ट्र से कहा था कि वो सरकारी सैनिकों के साथ संघर्षविराम की अंतरराष्ट्रीय अपील मानने को तैयार हैं लेकिन हथियार त्यागने के लिए तैयार नहीं है. श्रीलंका की सरकार की यह शर्त है कि पहले तमिल विद्रोही हथियार डालें. तमिल विद्रोहियों का संगठन एलटीटीई संघर्षविराम के लिए हथियार डालने की शर्त मानने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं हैं. कुछ वर्षों को छोड़, पिछले दो दशकों से ज़्यादा समय से दोनों पक्षों के बीच संघर्ष चलता रहा है. हाल में श्रीलंका की सेना ने एलटीटीई को उसके गढ़ माने जाने वाले अनेक इलाक़ों से खदेड़ दिया है. अब एलटीटीई का नियंत्रण उत्तरी श्रीलंका के छोटे से क्षेत्र में सीमित है. | इससे जुड़ी ख़बरें एलटीटीई का दावा: हमला आत्मघाती था21 फ़रवरी, 2009 | भारत और पड़ोस नागरिकों को मदद की पेशकश18 फ़रवरी, 2009 | भारत और पड़ोस श्रीलंका: ताज़ा संघर्ष में आम नागरिक मरे18 फ़रवरी, 2009 | भारत और पड़ोस 'आम लोगों को निशाना बना रहे हैं विद्रोही' 16 फ़रवरी, 2009 | भारत और पड़ोस श्रीलंका में घायलों को निकालने का प्रयास11 फ़रवरी, 2009 | भारत और पड़ोस श्रीलंका में आत्मघाती हमला, कई हताहत09 फ़रवरी, 2009 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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