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श्रीलंका: ताज़ा संघर्ष में आम नागरिक मरे | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंका में सरकारी सेनाओं और तमिल विद्रोहियों के बीच ताज़ा संघर्ष में कई आम नागरिकों के मारे जाने की रिपोर्टें मिल रही हैं. संवाद समिति एसोसिएटेड प्रेस ने तमिल विद्रोहियों के नियंत्रण वाले इलाक़े में एक डॉक्टर के हवाले से ख़बर दी है कि गोलाबारी में कम से कम 38 नागरिकों की मौत हो गई है. उधर तमिल विद्रोहियों के संपर्क में रह रहे सूत्रों के अनुसार वायु हमलों में कम से कम पचास ऐसे लोग मारे गए हैं जो युद्ध में शामिल नहीं हैं. हालांकि सरकार ने इस दावे को ग़लत क़रार दिया है और कहा है कि वायु सेना ने उन इलाक़ों पर हमला नहीं किया है जहां आम नागरिक रह रहे हैं. संघर्ष वाले इलाक़ों से कोई स्वतंत्र रिपोर्ट नहीं आ रही है इसलिए इन दावों की सत्यता जांच पाना मुश्किल हो रहा है. श्रीलंका में पिछले एक साल से संघर्ष चल रहा है और पिछले एक महीने में श्रीलंकाई सेना ने एलटीटीई के कब्ज़े वाले कई इलाक़ों पर नियंत्रण कर लिया है. इससे पहले भारत सरकार ने श्रीलंका में संघर्ष में फँसे हज़ारों नागरिकों को बाहर निकालने में मदद करने की बात कही है. विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी ने बुधवार को संसद में एक बयान देकर कहा कि मुखर्जी ने कहा कि श्रीलंका में सेना बहुत आगे बढ़ी है उसने किलिनोची और एलिफ़ेंट दर्रे पर नियंत्रण कायम कर लिया है लेकिन आम नागरिकों की सुरक्षा और घायलों को संघर्ष वाले क्षेत्र से निकालना एक चिंता का विषय है. |
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