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भारत आईएईए के साथ हस्ताक्षर करेगा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के साथ सुरक्षा निगरानी संबंधी एक समझौते पर सोमवार को हस्ताक्षर करेगा. वियना में भारतीय राजदूत सौरभ कुमार ने समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में कहा,'' भारत परमाणु सुरक्षा प्रावधानों संबंधी समझौते पर सोमवार को हस्ताक्षर करेगा. इसको आईएईए के सदस्य देशों ने पिछले साल अगस्त में मंज़ूरी दे दी थी.'' अमरीका के साथ परमाणु समझौते से पहले ही भारत के सामने सुरक्षा संबंधी समझौते पर दस्तख़त करने की शर्त रखी गई थी ताकि वह परमाणु संपन्न राष्ट्रों के साथ परमाणु सामग्री और तकनीकी का असैन्य इस्तेमाल कर सके. सितंबर में परमाणु तकनीक के निर्यात और बिक्री पर नियंत्रण रखने वाला 45 सदस्यीय परमाणु सप्लायर्स ग्रुप (एनएसजी) भी भारत को विशेष छूट देने पर सहमत हो गया था. ये छूट पाने के लिए भारत को पूर्व शर्त के अनुसार अपने 22 में से 14 असैन्य परमाणु संयंत्रों को निगरानी के लिए आईएईए को मंजूरी देनी होगी. निगरानी की अनुमति भारत के छह परमाणु संयंत्र पहले से ही विभिन्न समझौतों के तहत निगरानी में हैं और इनके अलावा अब आठ और परमाणु संयंत्रों को समझौते के तहत लाया जाएगा. इस समझौते के बाद आईएईए के पर्यवेक्षक भारतीय असैनिक परमाणु ठिकानों की निगरानी करेंगे ताकि परमाणु ईंधन सैनिक कार्यों के लिए इस्तेमाल न हो. इस समय भारत अपनी बिजली की ज़रुरतों का तीन प्रतिशत परमाणु संयंत्रों से बनाता है और अनुमान है कि वर्ष 2050 तक वह 25 प्रतिशत बिजली परमाणु संयंत्रों से बनाने लगेगा. भारत के पास यूरेनियम और कोयले का तो सीमित भंडार है लेकिन भारत के पास दुनिया के थोरियम भंडार का 25 प्रतिशत है और संभावना है कि इसके उपयोग से भारत को भारी लाभ मिलेगा. भारत सरकार का मानना है कि इस समझौते से उसे देश और अर्थव्यवस्था की बढ़ती ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी. हालांकि भारत में अनेक विपक्षी दल इस तर्क से सहमत नहीं हैं. उधर अंतरराष्ट्रीय समीक्षकों का मानना है कि इससे परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर न करने के बावजूद भारत को अपने परमाणु ऊर्जा उद्योग का विस्तार करने की अनुमति मिल गई है. |
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