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नक्सलियों ने की बातचीत की पेशकश | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
छत्तीसगढ़ में नक्सलियों ने सरकार के साथ बातचीत की पेशकश की है और कहा है कि सरकार को इसके लिए 'अनुकूल जनवादी माहौल' बनाना चाहिए. राज्य की रमन सिंह सरकार ने इस पेशकश का स्वागत करते हुए कहा है कि अगर नक्सली हथियार छोड़कर बातचीत करने को तैयार हों तो सरकार भी उनसे बात करने को तैयार है. सरकार ने इस बातचीत के लिए किसी मध्यस्थ की भूमिका का भी स्वागत किया है. उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ उन राज्यों में से है जो नक्सली गतिविधियों से सबसे अधिक प्रभावित है. राज्य सरकार दावा करती रही है कि नक्सलियों के ख़िलाफ़ चल रहे सलवा जुड़ूम आंदोलन के चलते वहाँ नक्सली गतिविधियाँ कम हुई हैं लेकिन सलवा जुड़ूम को लेकर भी सवाल खड़े किए जाते रहे हैं. प्रस्ताव छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के प्रवक्ता ने मीडिया के ज़रिए बातचीत की पेशकश की है. दंडकारण्य ज़ोनल कमेटी के प्रवक्ता पांडु उर्फ़ पांडन्ना ने एक बयान जारी करके कहा है वे बातचीत के लिए तैयार हैं अगर इसके लिए 'अनुकूल जनवादी वातावरण' निर्मित हो. उन्होंने अपने बयान में कहा है, "इस बातचीत के लिए सरकार को सकारात्मक पहल करनी होगी." उनका कहना था कि सरकार बातचीत की बात तो करती है लेकिन वह बातचीत का माहौल नहीं बनाती. लेकिन इसी बयान में प्रवक्ता ने बस्तर में आदिवासियों पर हो रहे अत्याचार का ज़िक्र किया है और कहा गया है कि सरकार की कार्रवाई के चलते एक हज़ार से भी अधिक आदिवासियों की मौत हुई है और एक हज़ार गाँवों को जला दिया गया है. उन्होंने आदिवासियों के लिए चलाए जा रहे राहत शिविरों पर भी सवाल उठाए हैं. स्वागत छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री ननकी राम कँवर ने नक्सलियों की बातचीत की पेशकश का स्वागत किया है लेकिन साथ ही हथियार छोड़ने की अपनी पुरानी शर्त दोहराई है. बीबीसी संवाददाता फ़ैसल मोहम्मद अली से हुई बातचीत में उन्होंने कहा कि उन्हें भी इस पेशकश की जानकारी मीडिया के ज़रिए ही हुई लेकिन सरकार इसका स्वागत करती है. उन्होंने कहा, "बातचीत के लिए नक्सलियों को पहले हथियार छोड़ना होगा क्योंकि ऐसा नहीं हो सकता कि वे हथियार भी उठाए रहें और बातचीत भी हो." उन्होंने किसी मध्यस्थ की भूमिका का स्वागत किया लेकिन यह पूछे जाने पर कि बस्तर के कोंटा से कांग्रेस के विधायक कवासी लकमा ने कहा है कि वे मध्यस्थता करने को तैयार हैं, तो उन्होंने कहा कि वे एक राजनीतिक दल से हैं और अच्छा होगा कि मीडिया से जुड़ा कोई व्यक्ति यह भूमिका निभाने को तैयार हो. आंध्रप्रदेश में नक्सलियों के साथ हुए शांति समझौते का ज़िक्र आने पर उन्होंने कहा, "छत्तीसगढ़ सरकार सावधानी बरतेगी और यहाँ आंध्र प्रदेश जैसी स्थिति नहीं आने दी जाएगी." गृहमंत्री का कहना है कि राज्य में पुलिस ने जिस तरह से नक्सलियों के ख़िलाफ़ सख़्ती की है, हो सकता है कि उसी के कारण नक्सली अब बातचीत का प्रस्ताव किया हो. उल्लेखनीय है कि इससे पहले मुख्यमंत्री रमन सिंह एकाधिक बार कह चुके हैं कि अगर नक्सली हथियार छोड़ने को तैयार हों तो सरकार बातचीत के लिए तैयार है. | इससे जुड़ी ख़बरें छत्तीसगढ़ में नक्सलियों का उत्पात26 जनवरी, 2009 | भारत और पड़ोस 'नक्सली मुठभेड़' के दावे पर सवाल09 जनवरी, 2009 | भारत और पड़ोस नक्सली हमले में चार जवानों की मौत29 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस नक्सली हमले में छह जवानों की मौत29 अगस्त, 2008 | भारत और पड़ोस नक्सलवादियों से मुक़ाबला करेगा 'कोबरा'28 अगस्त, 2008 | भारत और पड़ोस नक्सली विस्फोट में 11 घायल02 अप्रैल, 2008 | भारत और पड़ोस 'मुठभेड़ में 13 माओवादी मारे गए'18 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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