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शुक्रवार, 09 जनवरी, 2009 को 22:17 GMT तक के समाचार
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'नक्सली मुठभेड़' के दावे पर सवाल

शवों को ले जाते ग्रामीण
पुलिस के पहुँचने से पहले ही ग्रामीण शवों को ले गए और अंतिम संस्कार कर दिया
छत्तीसगढ़ पुलिस ने क़रीब 15 नक्सलियों के एक मुठभेड़ में मारे जाने का दावा किया है और इसके बाद ग्रामीणों ने शिकायत की है कि सलवा जुडूम से जुड़े लोगों ने ग्रामीणों को अगवा कर उनकी हत्या कर दी और उसे 'मुठभेड़' क़रार दे दिया.

दंतेवाडा पुलिस ने गुरुवार को दावा किया था कि उसके एक गश्ती दल का सामना दक्षिण बस्तर के सिंघरम ग्राम के पास माओवादियों के एक समूह से हुआ था, जिसने उन पर हमला कर दिया और दोनों पक्षों के बीच गोलीबारी हुई जिसमें 15 नक्सली मारे गए.

पुलिस का कहना था कि उनके पास से हथियार और गोला बारूद भी बरामद हुए.

पुलिस का कहना था कि चूँकि इस इलाक़े में नक्सली सक्रिय हैं और पैदल पुलिस दल के लिए 15 शवों को देरशाम गोलापल्ली थाना तक लाना मुमकिन नहीं था इसीलिए पुलिस ने शव घटना स्थल पर ही रहने दिए.

शुक्रवार को पुलिस को शव नहीं मिल सके हैं क्योंकि ग्रामीणों ने उनका अंतिम संस्कार कर दिया था.

कथित मुठभेड़ के ठीक दूसरे दिन सिंघरम, दंतेश्पुरम, कुर्रस्गुरा और अन्य गाँव के निवासियों ने आरोप लगाया है कि पुलिस और सलवा जुड़ूम के एक बड़े दल ने इन गाँव में पहुँच कर उत्पात मचाया, लूटपाट की और बड़ी संख्या में लोगों, जिनमें महिलायें भी शामिल थीं, को साथ लेकर गाँव से बाहर चले गए.

शुक्रवार को घटना स्थल पर पहुँचने वाले स्थानीय पत्रकार शौकत अली का कहना था कि उन्हें और उनके साथियों को सिंघरम गाँव के पास सत्रह लाशें मिलीं जिनमें चार औरतें शामिल थीं और ग्रामीणों ने 'सलवा जुडूम' पर लोगों को घर से निकाल-निकालकर ले जाने और उन्हें मार देने का आरोप लगाया.

गंभीर आरोप

पत्रकार शौकत अली ने कहा कि गाँवों में मिले शवों पर वह वर्दी नहीं थीं जो अक्सर नक्सली धारण किए रहते हैं और वो आम ग्रामीणों जैसे कपड़े पहने हुए थे.

शव के पास विलाप करती एक आदिवासी महिला
ग्रामीण सलवा जुड़ूम पर हत्या का आरोप लगा रहे हैं

दंतेवाड़ा पुलिस ने शुक्रवार को बयान जारी किया है कि मारे जाने वालों में से छह नक्सलियों की शिनाख्त कर ली गई है.

बस्तर पुलिस महानिरीक्षक एएन उपाध्याय से जब बीबीसी ने ग्रामीणों के दावे के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा, "यह दावे ग़लत हैं और पुलिस शवों को गुरुवार के दिन सिर्फ़ इसलिए नहीं ला पाई क्योंकि ऐसा करना ख़तरनाक हो सकता था."

पुलिस का कहना है कि गोलापल्ली के इलाके में पहले भी पुलिस दल पर नक्सली हमले हो चुके हैं जिसमें कुछ पुलिसकर्मियों की जानें भी गई हैं.

हालाँकि छत्तीसगढ़ पुलिस ने कुछ नक्सलियों की शिनाख्त का दावा किया है लेकिन सिंघरम के पास मौजूद शव उन्हें नहीं मिल सके हैं क्योंकि मृतकों के परिवार वालों ने पहले ही वहाँ से हटाकर उनका अंतिम संस्कार कर दिया था.

गुरूवार को जारी एक बयान में पुलिस ने इस कथित मुठभेड़ को बहुत महत्वपूर्ण बताया था.

आदिवासी महासभा अध्यक्ष और इलाक़े के पूर्व विधायक मनीष कुंजाम पुलिस के मुठभेड़ के दावे को 'संदेहास्पद' बताते हुए इस पूरे मामले की जांच के मांग की है.

यह पहली बार नहीं है जब छत्तीसगढ़ पुलिस के मुठभेड़ के दावे पर सवाल उठाए जा रहे हों और ग्रामीण सलवा जुड़ुम पर आरोप लगा रहे हों.

सलवा जुड़ुम को लेकर मानवाधिकार संस्थाओं ने गंभीर आरोप लगाए हैं और इसे बंद करने की मांग की है.

दक्षिणी छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में सलवा जुडूम की शुरुआत के बाद से स्थानीय लोगों के एक बड़े वर्ग की निगाह में पुलिस और सलवा जुडूम कार्यकर्ताओं में कोई फर्क नहीं है.

वर्ष 2005 के मध्य से जारी सलवा जुडूम सरकार समर्थित है और पिछले तीन सालों में ज़्यादातर पुलिस कार्रवाइयों में स्थानीय पुलिस बल ने विशेष पुलिस अधिकारियों की ही मदद ली है जो मुख्यतः जुडूम के कार्यकर्ता हैं.

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