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'नक्सलवाद के ख़िलाफ़ विशेष बल बने' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने देश में बढ़ते नक्सलवाद पर गहरी चिंता जताते हुए राज्यों से इससे निपटने के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित और समर्पित सुरक्षातंत्र बनाने को कहा है. आंतरिक सुरक्षा मुद्दे पर केंद्र सरकार और सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों की दिल्ली में गुरूवार को हुई बैठक में प्रधानमंत्री ने नक्सली चरमपंथ को भारत की मौजूदा सबसे बड़ी चुनौती बताया. प्रधानमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद को ख़तरनाक 'वायरस' बताते हुए कहा, "हम जब तक नक्सलवाद के इस वाइरस को ख़त्म नहीं कर देंगें तब तक चैन से नहीं रहा जा सकता." उन्होंनें कहा नेपाल से भारतीय राज्य आंध्र प्रदेश तक लाल गलियारा यानी रेड कॉरिडोर बनाने का नक्सलियों का दावा एक बढ़ा-चढ़ा कर कही गई बात है हालांकि उन्होंनें स्वीकार किया कि नक्सलवादी चरमपंथी अपना प्रभाव क्षेत्र बढ़ाने में कुछ हद तक कामयाब हुए हैं. इस सम्मेलन के कवरेज के लिए मीडिया को इजाज़त नहीं दी गई थी. इसे भारत के गृह मंत्रालय ने आयोजित किया था जिसमें राज्यों के मुख्यसचिव, पुलिस प्रमुख, अर्द्धसैनिक बलों और खुफ़िया एजेंसियों के प्रमुख भी शामिल थे. प्रमुख समस्या छत्तीसगढ़ राज्य के दंतेवाड़ा ज़िले में हाल में जेल तोड़ने की घटना का ख़ासतौर पर ज़िक्र करते हुए प्रधानमंत्री कहा कि यह कोई अकेली घटना नहीं है और कोई ऐसा दिन नहीं बीतता जब कहीं वामपंथी चरमपंथ की घटना नहीं होती हो. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि पिछले कुछ सालों के दौरान नक्सली समूहों की गतिविधियों के नए पहलू उजागर हुए हैं, वे प्रमुख आर्थिक ठिकानों को निशाना बना रहे हैं और प्रमुख राजनीतिक नेताओं की हत्या कर रहे हैं. उन्होंने मुख्यमंत्रियों को आश्वासन दिया कि समर्पित और विशेषज्ञ बल गठित करने में केंद्रीय गृह मंत्रालय उनकी पूरी मदद करेगा क्योंकि ग़ैरप्रशिक्षित सुरक्षाकर्मी आधुनिक हथियारों से लैस नक्सली चरमपंथ का ठीक तरह से मुक़ाबला नहीं कर सकते. पुलिस की क्षमताएँ बढ़ाने और उनके लिए बेहतर प्रशिक्षण सुविधाएँ उपलब्ध कराने पर ज़ोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, "'मैंने सुना है कि दांतेवाड़ा जेल तोड़े जाने की घटना के समय वहाँ केवल तीन कर्मचारी तैनात थे." मनमोहन सिंह ने आर्थिक ढाँचागत विकास की गतिविधियों को सुरक्षा प्रदान करने पर ज़ोर देते हुए कहा कि नक्सलवाद तो कुछ क्षेत्रों तक सीमित है लेकिन देश में चरमपंथ एक बड़ी समस्या बन कर राज्यों को उतना ही प्रभावित कर रहा है. ग़ौरतलब है कि साल 2007 में आंध्र प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश राज्यों में बड़े चरमपंथी हमले हुए हैं. प्रधानमंत्री ने कहा कि खुफिया एजेंसियों ने देश में और भी हमले होने की आशंका ज़ाहिर की है. |
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