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हैदराबाद धमाके: मौत से जूझते राम-रहीम | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
हैदराबाद के यशोदा अस्पताल के गहन चिकित्सा कक्ष में राम और रहीम दोनों ज़िंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं. शनिवार शाम हुए बम धमाकों मे दोनों को एक जैसी चोटें आई हैं, फ़र्क इतना है कि बम के कुछ टुकड़े राम के सिर के अंदर फंसे रह गए जबकि उसी बम के टुकड़े रहीम के सिर के आरपार हो गए. डॉक्टरों ने दोनों के सिर का ऑपरेशन किया है, लेकिन इस ऑपरेशन की कामयाबी के बारे में डॉक्टर 48 घंटे बाद ही कुछ कह पाएंगे. फिलहाल डॉक्टर उनकी स्थिति पर गहरी नज़र रखे हैं और उनकी सलामती की दुआ कर रहे हैं. यशोदा अस्पताल के डॉक्टर ए हरीकुमार के अनुसार राम और रहीम दोनों की ही हालत बेहद नाज़ुक है और अगर वो बच भी जाते हैं तो उनके लिए सामान्य जीवन जीना मुश्किल होगा. भारत के सामाजिक तानेबाने को परिभाषित करने के लिए राम-रहीम नाम साथ लिए जाते रहे हैं और अब हैदराबाद के अस्पताल में आसपास के बिस्तर पर ज़िंदगी की जंग लड़ रहे हैं राम और रहीम. ये इस बात का उदाहरण है कि बम धमाके करने वाले न राम के हो सकते हैं न रहीम के, उनका अगर कोई मक़सद है तो वो है आपसी भाईचारे को तोड़ना, राम रहीम के बनाए तानेबाने को छिन्न भिन्न कर देना. लेकिन हैदराबाद का आम शहरी जिस तरह से धमाकों के ज़िम्मदारों की निंदा कर रहा है, उससे साफ़ है कि आख़िरकार जीत इंसानियत की ही होगी और राम रहीम की संस्कृति ही आगे बढ़ेगी. |
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