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'हाथ बाँधकर बीच समुद्र में छोड़ दिया' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अवैध रूप से थाईलैंड में घुसने की कोशिश करने वाले बर्मा और बांग्लादेश के लोगों को थाई सुरक्षा बलों ने समुद्र में बिना इंजन वाली नाव में बिठाकर बीच समुद्र में छोड़ दिया था. इस घटना के बाद जीवित बचे लोगों ने थाईलैंड के सुरक्षा सैनिकों पर ये गंभीर आरोप लगाए हैं. जीवित बचे लोग भारत के अंडमान टापू पर हैं, उन्होंने बीबीसी से बातचीत में बताया है कि रोज़ी-रोटी की तलाश में अवैध रूप से वे समुद्र के रास्ते थाईलैंड गए थे जहाँ उन्हें कोह साई दायंग टापू पर हिरासत में रखा गया था. इन लोगों को थाई सुरक्षाकर्मियों ने बीच समुद्र में बिना इंजन वाली नाव में बिठाकर छोड़ दिया था और उनमें से कई लोगों को भारतीय तटरक्षक बल ने बचा लिया है. भारतीय तटरक्षक बल का कहना है कि उसने ऐसे 320 लोगों को बचाया है जो अंडमान के राहत शिविर में हैं. बर्मा के ज़ाव विन को भी भारतीय तटरक्षक दल ने बंगाल की खाड़ी से बचाया, विन कहते हैं, "थाई सैनिकों ने हमारे हाथ बाँध दिए और हमें बिना इंजन वाली नाव पर बिठा दिया, ये नावें बड़ी मोटरबोटों से जुड़ी थीं और बीच समुद्र में बंधी थीं. वे हमें मरने के लिए छोड़कर चले गए." एक अन्य व्यक्ति ने बताया, "नाव हालत बहुत बुरी थी, कई लोग तो भूख-प्यास से बेहाल होकर पानी में कूद गए और आत्महत्या कर ली, ढेर सारे लोग बिना खाना-पानी के मर गए." विन की नाव भारतीय जलसीमा के भीतर थी और उस पर बंधे लोग पिछले 12 दिनों से बिना खाने-पीने के पड़े हुए थे. भयावह स्थिति विन ने अंडमान से एक राहत अधिकारी के मोबाइल फ़ोन पर बीबीसी को बताया, "हमारे पास खाना-पानी कुछ नहीं था, थाई सैनिक चाहते थे कि हम बोट पर ही मर जाएँ." जीवित बचे अन्य लोगों का कहना है कि उन्हें एक बड़ी सी नाव पर छोड़ दिया गया जिस पर 400 लोग थे, इस नाव पर दो बोरी चावल, दो ड्रम पीने का पानी था. नाव पर हाथ बाँधकर छोड़े गए लोगों में से एक मोहम्मद ने कहा, "क़िस्मत से मेरे हाथ खुल गए, खाना-पानी दो दिन में ख़त्म हो गया, पंद्रह दिन तक हम भूखे-प्यासे पड़े रहे, इसके बाद हमें एक लाइटहाउस दिखाई दिया तो हमने तैर पर किनारे तक जाने की कोशिश की." इन लोगों को भी भारतीय तटरक्षक बल ने बचाया, उन्हें राहत शिविर में ले जाकर खाना-पानी और दवाइयाँ दीं. अंडमान के स्वास्थ्य अधिकारी रतन कार ने कहा, "इन सब लोगों के शरीर में पानी की बहुत कमी हो गई थी, हम जितना हो पा रहा है उतना कर रहे हैं." ये सभी लोग अपनी ज़िंदगी भर की जमा पूंजी एजेंटों और दलालों को देकर थाईलैंड पहुँचने की कोशिश कर रहे थे लेकिन थाई सुरक्षा बलों के हत्थे चढ़ गए. आलोचना मानवाधिकार संगठनों ने थाईलैंड के अधिकारियों के "अमानवीय और क्रूर" रवैए की कड़ी आलोचना की है, बैंकॉक में रहने वाले मानवाधिकार कार्यकर्ता क्रिस लेवा का कहना है, "यह हर तरह के बुनियादी मानवाधिकारों का पूर्ण उल्लंघन है, यह एक मानवीय समस्या है जिसका मानवीय तरीक़े से हल निकाला जाना चाहिए." रिफ़्यूज़ी इंटरनेशनल के शॉन ग्रासिया ने कहा, "थाईलैंड को चाहिए वह बिना कागज़ात के आने वाले शरणार्थियों की ठीक से जाँच करे और उनकी जान को ख़तरे में डाले बिना कार्रवाई करे." कोलकाता में स्थित थाई दूतावास के अधिकारियों ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देने या टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है. | इससे जुड़ी ख़बरें 'प्रवासन से स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ'22 जून, 2005 | पहला पन्ना अवैध आप्रवासियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई21 अप्रैल, 2006 | पहला पन्ना दुनिया में 19 करोड़ प्रवासी:संयुक्त राष्ट्र07 जून, 2006 | पहला पन्ना ब्रिटेन में बसने के लिए 'कड़ी परीक्षा'21 फ़रवरी, 2008 | पहला पन्ना रिश्तों की समस्या से जूझता गोपालगंज27 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस बाहरी लोगों के बसने पर रोक की माँग04 जनवरी, 2005 | भारत और पड़ोस शादियों के बहाने घपला25 अप्रैल, 2005 | पहला पन्ना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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