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सोमवार, 22 दिसंबर, 2008 को 13:43 GMT तक के समाचार
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अंतुले मुद्दे पर दोनों सदन स्थगित
अंतुले
विपक्षी दलों के सदस्य अंतुले के इस्तीफ़े की मांग कर रहे थे
मुंबई हमलों में महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) के प्रमुख हेमंत करकरे के मारे जाने के बारे में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री एआर अंतुले के बयान पर संसद के दोनों सदनों में भारी हंगामा हुआ.

हंगामे की वजह से सोमवार सुबह राज्यसभा और लोकसभा की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी.

पहले लोकसभा का कार्यवाही दोपहर एक बजे तक जबकि राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई.

दोपहर एक बजे जब लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई तब भी विपक्ष के सदस्यों ने जमकर हंगामा किया.

विपक्षी दलों के सदस्य अंतुले के मामले पर गृहमंत्री पी चिदंबरम या प्रधानमंत्री से स्पष्टीकरण देने और अंतुले के इस्तीफ़े की मांग कर रहे थे.

हंगामा देखते हुए लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी सदन की कार्यवाही दोबारा दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी.

मौत पर हैरानी

अंतुले ने मीडिया में बयान दिया था जिसमें उन्होंने मुंबई आतंकवाद निरोधक दस्ते के प्रमुख हेमंत करकरे की मौत की परिस्थितियों पर हैरानी जताई थी.

 इस्तीफ़ा देने के लिए अंतुले जैसे व्यक्ति को कहने की ज़रूरत नहीं पड़ती. करकरे महान आदमी थे जिनसे सैंकड़ो आतंकवादियों को भय लगता. लाखों हिंदुस्तानियों के दिमाग में ये है कि करकरे की मौत कैसे हो गई और किसने उन्हें मौत के मुँह में भेजा?
एआर अंतुले

उन्होंने कहा था कि ताज और ओबेरॉय की जगह करकरे को स्टेशन पर क्यों भेजा गया, इसकी जाँच होनी चाहिए.

विपक्षी दलों ने उनके इस्तीफ़े की भी मांग की थी. कांग्रेस ने अंतुले के बयान की सफ़ाई यह कहकर दी थी कि ये उनकी व्यक्तिगत राय है.

अंतुले ने इस्तीफ़े के बारे मीडिया के सभी सवालों से पल्ला झाड़ लिया और सीधा जवाब देने से मना कर दिया. वे अपने रुख़ पर अड़े नज़र आए और उन्होंने ये भी कहा कि उन्होंने पार्टी या सरकार को शर्मिंदा नहीं किया है.

उनका कहना था, "इस्तीफ़ा देने के लिए अंतुले जैसे व्यक्ति को कहने की ज़रूरत नहीं पड़ती. करकरे महान आदमी थे जिनसे सैंकड़ो आतंकवादियों को भय लगता. लाखों हिंदुस्तानियों के दिमाग में ये है कि करकरे की मौत कैसे हो गई और किसने उन्हें मौत के मुँह में भेजा?"

इस्तीफ़े की पेशकश

उनका कहना था कि वे पार्टी के सिपाही हैं और पार्टी और सरकार के हित में जो कुछ भी ज़रूरी है, वे करने को तैयार हैं.

इसके बाद बुधवार और गुरुवार को भी इस मामले पर संसद में ख़ासा हंगामा हुआ था. अंतुले ने कहा था कि वे केवल आला अधिकारियों की मौत की परिस्थितियों के बारे में हैरान हैं और चाहते हैं कि इस घटना की जाँच हो.

भारी आलोचना के बाद उन्होंने अपने इस्तीफ़े की पेशकश भी की थी.

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