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प्रार्थना सभा के बाद ट्राइडेंट खुला | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मुंबई में 26 नवंबर के चरमपंथी हमलों का निशाना बना ट्राइडेंट होटल रविवार को प्रार्थना सभा के बाद मेहमानों के लिए दोबारा खोला गया है. चरमपंथी हमलों के दौरान होटल की इमारतों को व्यापक नुक़सान पहुँचा था. लेकिन इन होटल के एक हिस्से को मरम्मत के बाद खोला गया है.ट्राइडेंट ने 550 कमरे उपलब्ध करवाएँ हैं. ताज होटल को भी रविवार को शाम को खोला जाएगा. दोनों होटलों में मेहमानों का आने का सिलसिला रविवार से शुरू हो जाएगा. ताज ने दोबारा शुरुआत के लिए एक पार्टी का आयोजन किया है जिसमें लगभग एक हज़ार अतिथियों को आमंत्रित किया गया है. दोनों होटलों के प्रबंधन ने ये सार्वजनिक नहीं किया है कि कितने लोगों ने होटल में बुकिंग कराई है. ताज अपने टावर विंग में 268 कमरे खोलेगा. उम्मीद की जा रही है कि दोनों होटलों में सुरक्षा के नए उपाए किए जाएँगे. टाटा के प्रबंधन वाले ताज ने घोषणा की है कि भविष्य में चरमपंथी हमलों को रोकने के लिए उपाए किए जाएँगे. हालाँकि उपाए कैसे होंगे, इस पर प्रबंधन चुप्पी साधे हुए है. ट्राइडेंट होटल में एक कर्मचारी ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, " हम कोई उत्सव नहीं मना रहे हैं. क्रिसमस या नववर्ष पार्टियों के लिए होटल कोई बुकिंग नहीं कर रहा है." ग़ौरतलब है कि मुंबई चरमपंथी हमलों में 170 से अधिक लोग मारे गए थे और भारत ने पाकिस्तान स्थित चरमपंथी गुटों को इन हमलों के लिए ज़िम्मेदार ठहराया था. ऐतिहासिक ताज मुंबई का ताज होटल मात्र होटल नहीं है, ये वास्तुशिल्प का एक प्रतिबिंब है जो शहर के इतिहास की याद ताज़ा कराता है.
चरमपंथियों के हमले से होटल की सुंदरता और शिल्प को नुक़सान पहुंचा है. ब्रितानी काल में बने सबसे सुंदर इमारतों में ताज होटल का नाम शुमार होता है. इसका निर्माण वर्ष 1903 में हुआ था और ये भारत का पहला लक्ज़री होटल था. इसके निर्माण में क़रीब ढाई लाख पाउंड लगे थे और ये वो जगह थी जहाँ भारत के वायसराय, महाराजाओं और बड़े लोगों से मिला करते थे. आज़ादी के बाद भी इसकी सुंदरता न केवल बरक़रार रही बल्कि इसका महत्व भी वैसा ही बना रहा. हर साल इस इमारत में बदलाव होते रहे और नई इमारतें जुड़ती रहीं लेकिन इसकी ख़ूबसूरती कभी घटी नहीं. |
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