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ताज और ट्राइडेंट फिर हुए गुलजार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मुंबई में चरमपंथी हमलों का निशाना बनने के महज एक माह के भीतर ताज और ट्राइडेंट होटल के दरवाजे फिर से अतिथियों के लिए खोल दिए गए हैं. पिछले महीने 26 नवंबर को हुए चरमपंथी हमलों में दोनों होटलों को काफी नुकसान पहुँचा था लेकिन तेजी से मरम्मत का काम पूरा कर लिया गया. इन हमलों में 170 से ज़्यादा लोग मारे गए थे और 250 से ज़्यादा घायल हुए थे. दोनों होटलों में हुए हमलों में लगभग 70 अतिथि और होटल कर्मचारी मारे गए थे. ट्राइडेंट के दरवाजे रविवार सुबह मारे गए लोगों की याद में प्रार्थना सभा के बाद अतिथियों के लिए खोल दिए गए और पहले ही दिन लगभग तीस लोगों ने होटल में कमरे बुक कराए. फिर शाम को टाटा समूह का ताज होटल भी आम लोगों के लिए खोल दिया गया जहाँ चरमपंथियों के ख़िलाफ़ संघर्ष का अंत हुआ था. इस मौके पर टाटा समूह के चेयरमैन रतन टाटा ख़ुद मौजूद थे. उन्होंने कहा, "ये हमारे लिए नए युग की शुरुआत है. हमने दिखा दिया है कि हम पीछे हटने वाले नहीं हैं." आत्मविश्वास ट्राइडेंट होटल के एक हिस्से को मरम्मत के बाद खोला गया है.ट्राइडेंट ने 550 कमरे उपलब्ध करवाएँ हैं. ताज अपने टावर विंग में 268 कमरे खोलेगा.
उम्मीद की जा रही है कि दोनों होटलों में सुरक्षा के नए उपाए किए जाएँगे. टाटा के प्रबंधन वाले ताज ने घोषणा की है कि भविष्य में चरमपंथी हमलों को रोकने के लिए उपाए किए जाएँगे. ट्राइडेंट होटल में एक कर्मचारी ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, " हम कोई उत्सव नहीं मना रहे हैं. क्रिसमस या नववर्ष पार्टियों के लिए होटल कोई बुकिंग नहीं कर रहा है." मुंबई का ताज होटल मात्र होटल नहीं है, ये वास्तुशिल्प का एक प्रतिबिंब है जो शहर के इतिहास की याद ताज़ा कराता है. चरमपंथियों के हमले से होटल की सुंदरता और शिल्प को नुक़सान पहुंचा है. ब्रितानी काल में बने सबसे सुंदर इमारतों में ताज होटल का नाम शुमार होता है. इसका निर्माण वर्ष 1903 में हुआ था और ये भारत का पहला लक्ज़री होटल था.
इसके निर्माण में क़रीब ढाई लाख पाउंड लगे थे और ये वो जगह थी जहाँ भारत के वायसराय, महाराजाओं और बड़े लोगों से मिला करते थे. आज़ादी के बाद भी इसकी सुंदरता न केवल बरक़रार रही बल्कि इसका महत्व भी वैसा ही बना रहा. हर साल इस इमारत में बदलाव होते रहे और नई इमारतें जुड़ती रहीं लेकिन इसकी ख़ूबसूरती कभी घटी नहीं. |
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