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संसद ने संघीय जाँच एजेंसी को मंज़ूरी दी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय संसद के दोनों सदनों ने राष्ट्रीय जाँच एजेंसी और ग़ैर क़ानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम संबंधी) संशोधन विधेयकों को पारित कर दिया है. गुरुवार देर रात राज्यसभा ने लंबी बहस के बाद इसे सर्वसम्मति से मंज़ूरी दे दी. लगभग आठ घंटे चली बहस का जबाव देते हुए गृह मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि ये विधेयक चरमपंथ से जुड़े अपराधों में जल्दी फ़ैसला सुनाएगा. उनका कहना था,'' कुछ सदस्यों ने कुछ संशोधन रखे थे, मैं हरेक के विचारों का आदर करता हूँ. हम अगले कुछ महीनों में देखेंगे कि ये क़ानून कैसे काम करता है, अगर ज़रूरत पड़ी तो हम इनका आकलन करेंगे.'' ग़ौरतलब है कि लोकसभा इसे पहले ही पारित कर चुकी है. अब ये विधेयक राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल के पास भेजे जाएंगे और उनके हस्ताक्षर के बाद ये क़ानून बन जाएँगे. पिछले माह मुंबई में हुए चरमपंथी हमलों के बाद राष्ट्रीय एजेंसी के गठन की माँग उठी थी. इस विधेयक के प्रावधानों के अनुसार राष्ट्रीय जाँच एजेंसी के पास देश की संप्रभुता, सुरक्षा और एकता को ख़तरा पहुँचाने वाली घटनाओं की जाँच का अधिकार होगा. भाजपा का कहना था कि ये आधा अधूरा क़दम है, लेकिन चरमपंथ के ख़िलाफ़ किसी भी कठोर कार्रवाई के सरकारी प्रस्तावों का पार्टी समर्थन करेगी. ग़ौरतलब है कि मुंबई में गत 26 नवंबर को हुए चरमपंथी हमलों के बाद इस तरह की एजेंसी गठित किए जाने के प्रस्ताव ने जोर पकड़ा था. हालांकि इस तरह की एक जाँच एजेंसी बनाए जाने का प्रस्ताव काफ़ी समय से विचाराधीन था. उल्लेखनीय है कि मुंबई में हुए चरमपंथी हमलों से उपजे हालात की समीक्षा के लिए बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में संघीय जाँच एजेंसी बनाने, केंद्र-राज्यों के बीच समन्वय बढ़ाने, क़ानूनी ढाँचा और ख़ुफ़िया एजेंसियों को मज़बूत बनाने पर सहमति बनी थी. |
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