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रसायन पीने से आदिवासियों की मौत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के अंडमान द्वीप में रहने वाले लुप्त प्राय ओंग समुदाय के कुछ आदिवासियों ने ग़लती से रासायनिक द्रव्य को शराब समझ कर पी लिया जिससे पाँच लोगों की मौत हो गई है. रासायनिक द्रव्य के पीने से 15 लोग बीमार हो गए हैं. इस समुदाय में मुश्किल से 100 लोग बचे हैं. दक्षिणी अंडमान ज़िले के पुलिस अधीक्षक अशोक चाँद ने बीबीसी को बताया, " जब बंगाल की खाड़ी से डूगोंग दर्रे के पास रसायन से भरा एक प्लास्टिक का डब्बा पहुँचा तो उसे ओँग आदिवासियों ने शराब समझ कर पी ली." अंडमान प्रशासन ने डूगोंग दर्रे में रहने वाले ओंगों को स्वास्थ्य सेवा पहुँचाने के लिए एक मेडिकल टीम को वहाँ पर भेजा है. मेडिकल टीम के प्रमुख रतन चंद्र कार ने बताया, "यह एक बडी त्रासदी है. हम कोशिश कर रहे हैं कि ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को बचा लें." इस हादसे में बुरी तरह बीमार लोगों को हेलीकाप्टर की सहायता से अंडमान द्वीप की राजधानी पोर्ट ब्लेयर से लाया गया है जहाँ स्वास्थ्य की बेहतर सुविधा उपलब्ध है. वर्ष 1901 में ओंग समुदाय में 672 लोग थे. पाँच लोगों की हुई मौत के बाद अब उनकी संख्या 95 ही रह गई है. 'असंवेदनशीलता' अंडमान में रहने वाले कुछ अन्य आदिवासियों का अब नामोनिशान मिट गया है. पर्यावरण विशेषज्ञों और मानवसास्त्रियों ने आदिवासियों के प्रति 'असंवेदनशीलता' के लिए प्रशासन को दोषी ठहराया है. अंडमान के आदिवासियों पर किताब लिखने वाली सीता वेंकटेश्वर का कहना है, "हमने कई बार प्रशासन से कहा है कि वे आदिवासियों और आसपास बसने वाले लोगों के बीच पनपने वाले संबंधों को कम करें. लेकिन यह नहीं हो पाया और अब आदिवासी शराब पीने की ख़तरनाक आदतों को अपना चुके हैं." ऐसा ही एक आदिवासी समुदाय जारावास की संख्या महज सैकड़ों में हैं. जारावास के निवास स्थान से होकर अंडमान ट्रंक रोड गुज़रती है जिससे उनके अस्तित्व पर ख़तरा मंडरा रहा है. हाल ही में जारावास समुदाय ने आसपास बसने वाले बाहरी लोगों पर हमला कर दिया था जिसमें कुछ लोगों की मौत हो गई और एक जारावास व्यक्ति भी मारा गया था. | इससे जुड़ी ख़बरें बाहरी लोगों के बसने पर रोक की माँग04 जनवरी, 2005 | भारत और पड़ोस अंडमान के लापता लोगों की तलाश06 जनवरी, 2005 | भारत और पड़ोस अंडमान के लिए बनी योजना पर विवाद02 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस पोर्ट ब्लेयर में पानी सबसे बड़ी चुनौती31 दिसंबर, 2004 | भारत और पड़ोस राहत कार्यों में स्थानीय ज़रूरतों की उपेक्षा 26 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस सेल्युलर जेल की 100वीं वर्षगांठ10 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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