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'एलटीटीई के नौसैनिक अड्डे में सेना' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंका की सेना का कहना है कि सेना देश के उत्तर-पूर्व में तमिल विद्रोहियों के ऐसे नगर में दाख़िल हुई है जिसे एलटीटीई संगठन नौसैनिक अड्डे के तौर पर इस्तेमाल करता है. श्रीलंकाई सेना मुलाइटिवु नगर के दस किलोमीटर दक्षिण में स्थित अलामपिल नगर में दाख़िल हुई है. सेना के मुताबिक ये देश के उत्तर-पूर्व में तटवर्ती इलाक़े में स्थित सबसे महत्वपूर्ण नगर है जिस पर एलटीटीई का कब्ज़ा था. तमिल विद्रोहियों की ओर से इस बारे में कोई टिप्पणी नहीं की गई है. सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर उदय नान्याकार ने फ़िलहाल ये नहीं बताया है कि कितने लोग हताहत हुए हैं. 'किलीनोची, मुलाइटिवु को घेरा' एलटीटीई के प्रशासनिक-राजनीतिक मुख्यालय किलीनोची के बाहरी इलाक़े में लड़ाई अब भी जारी है. किलीनोची विद्रोहियों की 'राजधानी' मानी जाती है और सेना किलीनोची पर तीन तरफ़ से हमला कर रही है. पर्यवेक्षकों का कहना है कि इस शहर पर सेना का कब्ज़ा इस बात का संकेत है कि श्रीलंका की सरकार और एलटीटीई के बीच सरकार का पलड़ा भारी है. विद्रोहियों को ख़ासी भूमि छोड़कर उत्तर-पूर्व में जाना पड़ा है. पिछले महीने से सेना ये कह रही है कि किलीनोची पर किसी भी समय कब्ज़ा हो सकता है. सेना ये भी कह रही है कि उसने मुलाइटिवु नगर को घेर रखा है जहाँ पर काफ़ी संख्या में विद्रोही मौजूद हैं. लेकिन एलटीटीई नेता वेलुपिल्लई प्रभाकरन ने कहा है कि यदि श्रीलंका की सरकार ये सोचती है कि वह पूरी तरह से सैन्य जीत हासिल कर पाएगी तो वह सपनों की दुनिया में जी रही है. | इससे जुड़ी ख़बरें किलीनोची के गांव पर सेना का कब्ज़ा20 अक्तूबर, 2008 | भारत और पड़ोस संघर्ष में श्रीलंका के कई सैनिक हताहत20 अक्तूबर, 2008 | भारत और पड़ोस श्रीलंका में संघर्ष, 'कई विद्रोही' मरे01 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस श्रीलंका मे स्थितियाँ क़ाबू से बाहर18 जनवरी, 2008 | भारत और पड़ोस उत्तरी श्रीलंका से दो लाख लोग विस्थापित04 अक्तूबर, 2008 | भारत और पड़ोस श्रीलंका में भीषण संघर्ष जारी, 33 मरे17 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस 'हवाई हमले में घायल हुए प्रभाकरण'20 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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