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गुरुवार, 20 दिसंबर, 2007 को 13:35 GMT तक के समाचार
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'हवाई हमले में घायल हुए प्रभाकरण'
प्रभाकरण
सरकार ने माना कि प्रभाकरण को मारने की कोशिश की गई
श्रीलंका सेना का कहना है कि पिछले महीने उत्तरी किलिनोची ज़िले में लिट्टे मुख्यालय पर हुए हवाई हमले में तमिल विद्रोही संगठन के प्रमुख वी प्रभाकरण घायल हो गए थे.

सेना के बयान में कहा गया है कि पिछले महीने 26 नवंबर को तमिल विद्रोही संगठन लिबरेशन टाइगर्स ऑफ़ तमिल ईलम (एलटीटीई) के मुख्यालय पर हमला किया था, जिसका मुख्य निशाना संगठन प्रमुख वेलुपिल्लई प्रभाकरण थे.

हालांकि अभी लिट्टे की ओर से इस संबंध में कोई बयान नहीं आया है.

सेना के बयान के मुताबिक़ वायुसेना के चार लड़ाकू विमानों ने किलिनोची के जयंतीनगर स्थित एलटीटीई के बंकरों पर 'सफलतापूर्वक' बम बरसाए थे.

बयान के अनुसार सेना के ख़ुफिया सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की है कि इन बंकरों में प्रभाकरण का अक्सर आना जाना होता है.

सरकार का रुख़

श्रीलंका की सरकार के एक मंत्री ने समाचार एजेंसी एएफ़पी को बताया, "हम लगातार प्रभाकरण को निशाना बनाने की कोशिश में हैं क्योंकि इसका उद्देश्य एलटीटीई के शीर्ष नेतृत्व को ख़त्म करना है."

इससे पहले नवंबर में किलिनोची में ही वायुसेना के हमलों में एलटीटीई के नंबर दो माने जाने वाले नेता एसपी तमिल सेल्वन मारे गए थे, तमिलसेल्वन वहाँ एक बैठक में हिस्सा लेने आए थे.

प्रभाकरण
नवंबर माह में सेना के हवाई हमले में एलटीटीई के नंबर दो नेता एसपी तमिलसेल्वन मारे गए थे

इसके ठीक बाद सरकार ने प्रभाकरण को उनके 53वें जन्मदिन के अवसर पर निशाना बनाने की कोशिश की थी.

ग़ौरतलब है कि एलटीटीई, श्रीलंका में तमिल अल्पसंख्यकों के लिए अलग राज्य की मांग को लेकर सेना के साथ संघर्षरत हैं.

हाल में उत्तरी और पूर्वी श्रीलंका में तमिल विद्रोहियों और सेना के बीच संघर्ष काफ़ी गहरा गया है.

जानकारों का मानना है कि देश के उत्तरी इलाक़ों में भीषण लड़ाई छिड़ सकती है और दोनों ही पक्ष इसकी तैयारी में जुटे हैं.

वर्ष 2002 में नार्वे की मध्यस्थता से एलटीटीई और श्रीलंका सरकार के बीच युद्धविराम पर सहमति बनी थी लेकिन दो साल पहले ये समझौता टूट गया.

तभी से तेज़ हुए संघर्ष में एक अनुमान के मुताबिक अब तक दोनों ओर से पाँच हजार लोग मारे गए हैं. जबकि 1983 से दोनों पक्षों के बीच जारी संघर्ष में लगभग 70 हजार लोगों ने अपनी जान गँवाई है.

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