|
प्रभाकरन की नॉर्वे के मंत्री से बातचीत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंका में अलगाववादी तमिल विद्रोही संगठन एलटीटीई और सरकार के बीच वार्ता दोबारा शुरु करवाने के लिए नॉर्वे के विदेश मंत्री जॉन पीटरसन एलटीटीई के नेता वेलुपिल्लै प्रभाकरन से मुलाक़ात कर रहे हैं. नार्वे की मध्यस्थता से दोनों पक्षों में बातचीत शुरु हुई थी और शांति प्रक्रिया की शुरुआत हुई थी लेकिन पिछले दो साल से ये ठप पड़ी है. वैसे तो नॉर्वे के प्रतिनिधि सूनामी के बाद राहत कार्यों के बारे में बात करने के लिए श्रीलंका गए हैं लेकिन माना जा रहा है कि असल बातचीत शांति वार्ता पर ही होगी. ऐसा कभी-कभी ही होता है कि भूमिगत हुए अलगाववादी नेता प्रभाकरन अपने अज्ञात स्थान से निकलकर किसी को मिलने जाएँ. मध्यथता कर रहे नॉर्व के विदेश मंत्री पहले ही श्रीलंका की राष्ट्रपति चंद्रिका कमारतुंगा से मिल चुके हैं. एलटीटीई ने सरकार पर तमिल इलाक़ो में राहत के संदर्भ में भेदभाव करने के आरोप लगाए हैं. लेकिन सरकार ने इन आरोपों का खंडन किया है. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि उम्मीद जताई जा रही है कि इस बातचीत के बाद शांति प्रक्रिया के आगे बढ़ेगी. इससे पहले एलटीटीई ने चेतावनी दी थी कि अगर सरकार शांति वार्ताओं में और देरी करती है तो फिर से संघर्ष शुरु हो सकता है. विद्रोहियों के रेडियो स्टेशन पर दिए गए एक भाषण में वेलुपिल्लै प्रभाकरन ने सरकार से अपील की थी कि एलटीटीई के प्रस्तावों पर शांति वार्ताएँ जल्द से जल्द शुरू की जाएँ. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||