|
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
प्रभाकरन नॉर्वे के दूतों से मिले
श्रीलंका में तमिल विद्रोहियों के नेता वेलुपिल्लई प्रभाकरन ने कहा है कि उनका संगठन शांति प्रक्रिया और संघर्षविराम की अपनी घोषणा के लिए प्रतिबद्ध है. प्रभाकरन ने गुरूवार को नॉर्वे के मध्यस्थों से मुलाक़ात के दौरान ये भरोसा जताया. मगर साथ ही उन्होंने देश में जारी राजनीतिक संघर्ष और शांतिप्रक्रिया के भविष्य के बारे में चिंता प्रकट की. तमिल नेता ये जानना चाहते हैं कि तमिलों के साथ शांतिवार्ता शुरू करने की ज़िम्मेदारी प्रधानमंत्री की है या राष्ट्रपति की. मुलाक़ात में नॉर्वे के प्रतिनिधियों ने तमिलों को राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री का ये संदेश दिया कि संघर्षविराम समझौते का पालन होगा. साथ ही तमिलों ने भी इन दूतों के हाथ कोलंबो कुछ संदेश भेजे हैं जिनमें कई मुद्दों पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया है. इससे पहले नॉर्वे के प्रतिनिधियों ने मंगलवार को राष्ट्रपति कुमारतुंगा और प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे से मुलाक़ात की थी. मुलाक़ात नॉर्वे के विदेश उपमंत्री विदर हेलगेसन और विशेष दूत इरिक सोइलहम को हेलीकॉप्टर से तमिलों के इलाक़े में ले जाया गया. पत्रकारों को वार्तास्थल से दूर रखा गया था और मुलाक़ात में क्या हुआ इसका ब्यौरा विदर हेलगेसन ने दिया. विदर हेलगेसन ने पत्रकारों से कहा कि तमिल विद्रोही ये साफ़-साफ़ जानना चाहते हैं कि शांतिवार्ता में सरकार की तरफ़ से कौन ज़िम्मेदार है. तमिल विद्रोहियों ने कहा है कि वे वैसे किसी भी पक्ष से बातचीत शुरू करने के लिए तैयार हैं जिनके पास जनादेश हो. तमिल नेताओं ने श्रीलंका में जारी राजनीतिक संघर्ष पर चिंता जताई है और इसपर अफ़सोस प्रकट किया है. नॉर्वे के मंत्री ने कहा कि तमिल नेता प्रभाकरन श्रीलंका सरकार के साथ हुए शांति समझौते के भविष्य को लेकर बेहद चिंतित हैं. नॉर्वे के दूत तमिल नेता के पास राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री का संदेश लेकर गए थे जिसमें शांति समझौते के पालन की गारंटी दी गई थी. ये मध्यस्थ तमिलों के भी कई संदेश लेकर जा रहे हैं जिनमें सरकार से कई व्यावहारिक मुद्दों पर स्थिति साफ़ करने को कहा गया है. इनमें श्रीलंका सरकार के प्रभाव वाले इलाक़ों में एलटीटीई के राजनीतिक कार्यकर्ताओं की सुरक्षा की गारंटी जैसे मुद्दे शामिल हैं. स्थिति श्रीलंका से बीबीसी संवाददाता फ़्रांसिस हैरिसन का कहना है कि तमिल विद्रोही बातचीत करना चाहते हैं मगर उसका आधार वे अंतरिम सरकार में सत्ता सहयोग के अपने प्रस्ताव को रखना चाहते हैं. मगर अभी ये पता नहीं है कि राष्ट्रपति कुमारतुंगा की पार्टी इसके लिए तैयार हो जाएगी. वैसे राष्ट्रपति के एक सलाहकार ने कहा है कि केवल यही प्रस्ताव बातचीत का आधार नहीं हो सकता. संवाददाता का कहना है कि श्रीलंका में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के मतभेद से उपजे राजनीतिकि संकट ने नॉर्वे के मध्यस्थों का काम भी मुश्किल में डाल दिया है. ऐसी ख़बरें हैं कि ये मध्यस्थ सभी पक्षों से कह रहे हैं कि ऐसे माहौल में उनके लिए सकारात्मक भूमिका निभाना कठिन होगा. |
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||