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श्रीलंका में संकट के बीच शांति वार्ता की कोशिश
श्रीलंका में राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंगा और प्रधानमंत्री रनिल विक्रमसिंघे के बीच जारी राजनीतिक संकट के बीच ही एलटीटीई के साथ शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए नॉर्वे के विशेष दूत राजधानी कोलंबो पहुँच गए हैं. नॉर्वे के विशेष दूत इरिक सोल्हेम और नॉर्वे के विदेश उपमंत्री विदर हेलगेसन श्रीलंका सरकार और तमिल विद्रोहियों के संगठन एलटीटीई के बीच सीधी बातचीत कराने के उद्देश्य से वहाँ पहुँचे हैं. हालाँकि श्रीलंका में जारी राजनीतिक संकट के कारण यह आशंका जताई जा रही थी कि ये दोनों अधिकारी शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए श्रीलंका जाने का कार्यक्रम रद्द भी कर सकते हैं. श्रीलंका में राजनीतिक संकट शुरू होने के ठीक पहले ही एलटीटीई ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में अंतरिम प्रशासन के बारे में एक प्रस्ताव सरकार को सौंपा था जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच बातचीत आगे बढ़ने की उम्मीद बँधी थी. मुश्किलें नॉर्वे के विदेश उपमंत्री विदर हेलगेसन ने कहा है कि अभी इस बारे में कुछ भी कहना जल्दबाज़ी होगी कि नई परिस्थिति में शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए क्या-क्या मुश्किलें आ सकती हैं.
राष्ट्रपति कुमारतुंगा का देश की संसद को निलंबित करने और महत्वपूर्ण विभागों वाले तीन मंत्रियों को बर्ख़ास्त करने की घोषणा के पीछे उनका यह डर समझा जा रहा है कि प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे और नॉर्वे के मध्यस्थ एलटीटीई को ज़्यादा रियायतें देने की कोशिश कर रहे हैं. लंबे समय से श्रीलंका में शांति प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे इरिक सोल्हेम ने कहा, "हमलोगों की यात्रा की योजना कुछ सप्ताह पहले बनी थी. हालाँकि अब स्थिति में बहुत बदलाव आ गए हैं लेकिन हमारे लिए यह ज़रूरी है कि हम प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे, राष्ट्रपति कुमारतुंगा और एलटीटीई के साथ संपर्क में रहें." उन्होंने कहा कि वे तब तक शांति प्रक्रिया की स्थिति पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते जब तक कि बातचीत फिर से शुरु न हो जाए. सोल्हेम ने कहा कि वे शांति प्रक्रिया में शामिल सभी पक्षों से बातचीत करना चाहेंगे. |
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