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शुक्रवार, 07 नवंबर, 2003 को 15:16 GMT तक के समाचार
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श्रीलंका में सर्वदलीय सरकार का प्रस्ताव
रनिल विक्रमसिंघे और चंद्रिका कुमारतुंगा
विक्रमसिंघे और कुमारतुंगा के बीच तमिल शांति प्रक्रिया को लेकर मतभेद थे

श्रीलंका की राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंगा ने देश के सभी राजनीतिक दलों के सामने मिल-जुलकर राष्ट्रीय सरकार बनाने का प्रस्ताव रखा है.

उन्होंने प्रधानमंत्री रनिल विक्रमसिंघे की सरकार पर देश की सुरक्षा और अखंडता को ख़तरे में डालने का आरोप लगाया.

कुमारतुंगे ने शुक्रवार को टेलीविज़न पर राष्ट्र को संबोधित किया.

उन्होंने कहा कि तमिल विद्रोहियों के साथ नॉर्वे की मध्यस्थता में बातचीत जारी रहेगी मगर इसमें शर्तें और कड़ी रखी जाएँगी.

इससे पहले प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे ने अमरीका से लौटकर देश की संसद को बहाल करने की माँग की.

आरोप

राष्ट्रपति कुमारतुंगा ने अपने संदेश में विक्रमसिंघे सरकार पर जान-बूझकर देश की सुरक्षा को नज़रअंदाज़ करने का आरोप लगाया.

उन्होंने कहा कि पिछले साल फ़रवरी में तमिल विद्रोहियों के साथ संघर्षविराम होने के बाद से हथियारों से लदे कई जहाज़ श्रीलंका लाए गए.

साथ ही उनका कहना था कि संघर्षविराम के बाद देश में तमिल विद्रोहियों की संख्या भी बढ़ गई.

उन्होंने कहा कि इसी कारण उन्हें प्रधानमंत्री से रक्षा मंत्रालय का भार लेना पड़ा, तीन मंत्रियों को बर्ख़ास्त करना पड़ा और संसद को निलंबित करना पड़ा.

प्रधानमंत्री

विक्रमसिंघे शुक्रवार को अमरीका से वापस लौटे और कोलंबो हवाई अड्डे पर बड़ी संख्या में उनके समर्थक जुटे थे.

विक्रमसिंघे ने संसद को फिर से बहाल किए जाने की माँग की है.

साथ ही उन्होंने राष्ट्रपति पर तमिल विद्रोहियों के साथ शांति प्रक्रिया को संकट में डालने का आरोप लगाया.

उधर प्रधानमंत्री रनिल विक्रमसिंघे ने कहा है कि वे संसद को बहाल करने के लिए कोशिश करते रहेंगे.

उन्होंने बताया कि ऐसा करना इसलिए ज़रूरी है क्योंकि संसद ही श्रीलंका में तमिल विद्रोहियों के साथ जारी शांति प्रक्रिया का केंद्र है.

उधर एलटीटीई ने कहा है कि राष्ट्रपति कुमारतुंगा के क़दम से शांतिप्रक्रिया को नुक़सान पहुँचा है.

आपातकाल

इससे पहले श्रीलंका की राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंगा देश में आपातकाल की अपनी घोषणा से पीछे हट गईं.

उन्होंने कहा कि आपातकाल को लागू करने के आदेश पर उन्होंने हस्ताक्षर कभी नहीं किए.

राष्ट्रपति कुमारतुंगा के एक प्रवक्ता ने बीबीसी को बताया कि देश में आपातकाल की स्थिति थी ही नहीं.

उन्होंने बताया कि जिन तीन मंत्रियों को उनके कुछ प्रभारों से मुक्त किया गया वे अभी भी मंत्रिमंडल में हैं.

साथ ही उन्होंने ये भी बताया कि संसद को बस दो सत्रों के बीच स्थगित किया गया है.

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