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श्रीलंका में आपातकाल घोषित
श्रीलंका की राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंगा ने देश में आपातकाल की घोषणा कर दी है. इससे पहले देश में सुरक्षा व्यवस्था से असंतुष्ट राष्ट्रपति ने तीन मंत्रियों को बर्खास्त कर दिया था और संसद को निलंबित कर दिया था. हालांकि अभी यह नहीं बताया गया है कि आपातकाल किस तरह लागू होगा लेकिन इससे सेना को असीमित अधिकार मिल जाएँगे. इस बीच सेना की गश्त बढ़ा दी गई है और सुरक्षा बंदोबस्त कड़े कर दिए गए हैं. लेकिन राष्ट्रपति ने कहा है कि तमिल विद्रोहियों के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ने का उनका कोई इरादा नहीं है और संघर्ष विराम जारी रहेगा.
दूसरी तरफ़ अमरीका की यात्रा कर रहे रनिल विक्रमसिंघे की सरकार ने ज़ोर देकर कहा है कि उन्हें संसद में बहुमत हासिल है. विदेश मंत्री टायरॉन फर्नांडो ने बीबीसी से बात करते हुए कहा, ''आपातकाल को संसद की मंज़ूरी की ज़रुरत होगी और चूँकि संसद में हमारा बहुमत है इसलिए हम इसे नकार देंगे''. उनका कहना था कि आपातकाल लगाना राष्ट्रपति का अधिकार है लेकिन वे अधिकतम एक महीने के लिए ही ऐसा कर सकते हैं. उन्होंने विश्वास जताया कि तमिल विद्रोहियों से बातचीत जारी रहेगी. सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा कि आपातकाल के आदेश को 14 दिन में संसद की मंजूरी मिली ज़रूरी है. लेकिन राष्ट्रपति कुमारतुंगा पहले ही संसद को निलंबित करने की घोषणा कर चुकी हैं. युद्धविराम जारी मंगलवार को रनिल विक्रमसिंघे सरकार के मंत्रियों की बर्ख़ास्तगी के बाद अटकलें लगाई जा रही थीं कि तमिल विद्रोहियों के साथ युद्ध विराम को भी समाप्त किया जा सकता है.
लेकिन राष्ट्रपति के मुख्य सलाहकार लक्ष्मण कदिरगमार ने बुधवार को कहा कि एलटीटीई के ख़िलाफ़ फिर से युद्ध छेड़ने का सरकार को कोई इरादा नहीं है. राष्ट्रपति कुमारतुंगा का विशेष संदेश सुनाते हुए उन्होंने कहा कि एलटीटीई के साथ बीस महीने से चल रहा युद्ध विराम जारी रहेगा. यह पूछने पर कि तीन मंत्रियों को क्यों बर्खास्त किया गया कादिरगमार ने कहा कि यह क़दम लगातार ख़राब हो रही सुरक्षा की स्थिति को देखते हुए उठाया गया है. उन्होंने कहा कि इसका तमिल विद्रोहियों को साझेदारी में सत्ता सौंपने के प्रस्ताव के साथ कोई लेना देना नहीं है. उल्लेखनीय है कि उत्तरी श्रीलंका में तमिल विद्रोहियों के साथ सत्ता में साझेदारी की घोषणा चार दिन पहले की गई थी. हांलांकि कादिरगमार ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि सत्ता में भागीदारी का यह समझौता अब लागू होगा या नहीं. वैसे कुमारतुंगा प्रधानमंत्री रनिल विक्रमसिंघे के नेतृत्व में चल रही शांति प्रक्रिया से नाख़ुश ही थीं. लेकिन मंगलवार को टेलीविज़न पर दिए गए राष्ट्र के नाम संदेश में राष्ट्रपति कुमारतुंगा ने कहा था कि वे एलटीटीई के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं. एलटीटीई नज़र रखे हुए है दूसरी ओर समाचार एजेंसियों के अनुसार एलटीटीई ने कहा है कि वे स्थितियों पर नज़र रखे हुए हैं और यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि इससे उनके शांति प्रस्तावों पर क्या असर पड़ेगा. उल्लेखनीय है कि उन्होंने श्रीलंका के रक्षा, सूचना और गृह मंत्री को बर्खास्त कर दिया था. अमरीका ने श्रीलंका के राजनीतिक गतिरोध पर चिंता जताई है. यह राजनीतिक घटनाक्रम ऐसे समय पर हो रहे हैं जब प्रधानमंत्री रनिल विक्रमसिंघे तमिल विद्रोहियों के शांति प्रस्तावों के बारे में अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश से चर्चा करने के लिए वॉशिंगटन पहुँचे हुए हैं. उन्होंने राष्ट्रपति बुश से बातचीत की है और बाद में कहा है कि उनकी सरकार को अब भी संसद के बहुत सारे सदस्यों का समर्थन हासिल है. |
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