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श्रीलंका में आपातकाल में सुरक्षा बढ़ी
श्रीलंका में आपातकाल की घोषणा के बाद राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंगा ने सत्ता पर अपनी पकड़ बढ़ानी शुरू कर दी है. उन्होंने रक्षा, आंतरिक सुरक्षा और सूचना मंत्रालय अपने हाथों में ले लिए हैं और प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे के विश्वस्त सलाहकारों को हटा कर नए लोगों की नियुक्ति की जा रही है. उधर रानिल विक्रमसिँघे ने वॉशिंगटन में दावा किया है कि बहुमत अभी भी उनके पास है और उन्होंने राष्ट्रपति कुमारतुंगा पर अराजकता फैलाने की कोशिश का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा है कि उनके देश में लौटते ही सब कुछ ठीक हो जाएगा. इस बीच यह आशंका जताई जा रही है कि इस राजनीतिक घटनाक्रम से देश में बीस महीने से चल रही शांति प्रक्रिया को धक्का पहुँचेगा. बीबीसी संवाददाता फ़्रांसिस हैरिसन के अनुसार अभी यह स्पष्ट नही कि इस राजनीतिक संकट का क्या हल निकलेगा. सुरक्षा व्यवस्था राजधानी कोलंबो की सड़कों पर सुरक्षा बल तैनात हैं. राह चलते लोगों से पूछताछ की जा रही है और उनके काग़ज़ात देखे जा रहे हैं. आपातकाल के बाद से सुरक्षाकर्मी सभी सरकारी इमारतों के सामने पहरा देते दिखाई पड़ रहे हैं. समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार कार्यकारी पुलिस प्रमुख इंद्रा डी सिल्वा ने देश के सभी पुलिस थानों को लिखित आदेश दिए हैं कि वे 'ख़ुफ़िया जानकारी इकट्ठी करें' और किसी भी घटना पर 'तत्काल कार्रवाई करें'. हालांकि वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे तत्काल कार्रवाई करने की स्थिति में नहीं है क्योंकि उन्हें अभी यह नहीं पता है कि आपातकाल के तहत कौन से नियम क़ानून प्रभावी होंगे. व्यापार समझौता टला इस बीच अमरीका ने श्रीलंका के साथ मुक्त व्यापार समझौते को फिलहाल टाल दिया है. प्रधानमंत्री रनिल विक्रमसिंघे की अमरीका यात्रा के दौरान इस समझौते पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद थी. लेकिन सरकार के प्रवक्ता जीएल पेरिस का कहना है कि देश में ताज़ा राजनीतिक गतिरोध के चलते अमरीका ने फ़िलहाल इसे टाल दिया है. श्रीलंका इस समझौते को लेकर बहुत उत्सुक था क्योंकि अमरीका रेडिमेड कपड़ों के व्यवसाय में उसका सबसे बड़ा साझेदार है. |
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