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श्रीलंका में बातचीत में सफलता नहीं
श्रीलंका में राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंगा और प्रधानमंत्री रनिल विक्रमसिंघे के बीच हुई बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकल सका. दोनों नेता अगले सप्ताह फिर मुलाक़ात करेंगे जिसमें दूसरे राजनीतिक दलों के भी नेता मौजूद रहेंगे. श्रीलंका में पिछले सप्ताह राजनीतिक संकट शुरू होने के बाद राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के बीच पहली बार बातचीत हुई है. तमिल विद्रोहियों के साथ शांति प्रक्रिया पर विक्रसिंघे सरकार से मतभेद के बाद राष्ट्रपति ने पिछले सप्ताह तीन मंत्रियों को बर्ख़ास्त करने के साथ-साथ संसद को निलंबित कर दिया था. इसके बाद राष्ट्रपति ने एक साझा राष्ट्रीय सरकार बनाए जाने का प्रस्ताव रखा जिसके बारे में बातचीत के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री को आमंत्रित किया. लेकिन प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे ने कहा है कि बातचीत में शांति प्रक्रिया को जारी रखने का मुद्दे को प्राथमिकता देनी चाहिए. इससे पहले तमिल विद्रोहियों ने इस बात की पुष्टि की है कि उनके नेता वेलुपिल्लई प्रभाकरन गुरूवार को नॉर्वे के प्रतिनिधियों से मुलाक़ात करेंगे. नॉर्वे के प्रतिनिधियों ने मंगलवार को प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे से मुलाक़ात की थी और बुधवार को उनका राष्ट्रपति कुमारतुंगा से मिलने का कार्यक्रम है. उम्मीद तमिल विद्रोहियों के संगठन एलटीटीई के एक वरिष्ठ नेता ने कहा है कि गुरूवार को उनके नेता वेलुपिल्लई प्रभाकरन नॉर्वे के विदेश उपमंत्री विदर हेलगेसन से मिलेंगे. विद्रोहियों के बातचीत के लिए राज़ी होने से माना जा रहा है कि वे देश के मौजूदा राजनीतिक संकट को गंभीरता से ले रहे हैं. इससे ये उम्मीद भी बंधी है कि वे फिर से संघर्ष को रोकने और शांति प्रक्रिया को जारी रखने के लिए हरसंभव प्रयास करना चाहते हैं. श्रीलंका में सरकार और तमिल विद्रोहियों के बीच मध्यस्थ देश नॉर्वे का एक प्रतिनिधिमंडल राजनीतिक संकट के बीच ही श्रीलंका पहुँचा है. इस दल में नॉर्वे के विशेष दूत इरिक सोल्हेम और नॉर्वे के विदेश उपमंत्री विदर हेलगेसन शामिल हैं. नॉर्वे के मध्यस्थ वैसे तो दोनों पक्षों के बीच बातचीत फिर शुरू करवाने के लिए आए थे मगर मौजूदा परिस्थितियों में ये दौरा राजनीतिक संकट को सुलझाने में कारगर हो सकता है. |
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