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'जाँच में सहयोग कर रही है एफ़बीआई' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी एटार्नी जनरल माइकल मोकैश के मुताबिक अमरीकी जाँच एजेंसी (एफ़बीआई) के एजेंट भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई में हुए चरमपंथी हमले की जाँच और सबूत जमा करने में भारतीय अधिकारियों की मदद कर रहे हैं. मोकैश ने यह नहीं बताया कि एफ़बीआई के एजेंट इस मामले में पाकिस्तान के साथ मिलकर काम कर रहे हैं या नहीं. उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि भारत सरकार ने किस तरह का अनुरोध किया है लेकिन एफ़बीआई ऐसे सबूतों की तलाश कर रही हैं जिसे वह जुटा सकती है. उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि कहीं भी होने वाली चरमपंथी कार्रवाई जिसमें अमरीकी नागरिक हताहत होते हैं वहाँ अमरीका जाँच कर सकता है." मुंबई में पिछले सप्ताह हुए सुनियोजित चरमपंथी हमले में छह अमरीकी नागरिकों समेत 180 से अधिक लोग मारे गए थे. जब उनसे पूछा गया कि भारत में हुए चरमपंथी हमले से क्या सबक मिले हैं तो उन्होंने कहा कि जहाँ अधिक हमले होते हैं वहाँ बेहतर ख़ुफ़िया और सुरक्षा व्यवस्था की जाए. भारत के साथ अमरीकी सेना के ज़्वाइंट चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ के अध्यक्ष एडमिरल माइक मुलेन नई दिल्ली में हैं. उनका रक्षामंत्री एके एंटोनी, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन और नौसेना अध्यक्ष और चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ कमेटी के अध्यक्ष एडमिरल सुरेश मेहता से मिलने का कार्यक्रम है. उन्होंने मुंबई में हुए चरमपंथी हमले में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देते हुए दोहराया कि अमरीकी सेना चरमपंथ के ख़िलाफ़ लड़ाई में भारतीय सेना के साथ मिलकर काम करती रहेगी. मुलेन ने इस हमले के ज़िम्मेदार लोगों की खोज में पाकिस्तान के साथ मिलकर काम करने की भारत की इच्छा के लिए धन्यवाद जताया. दक्षिण एशिया में बढ़ रहे चरमपंथी हमलों से निपटने के लिए उन्होंने सभी देशों से मिलकर काम करने की अपील की. |
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