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लश्कर-ए-तैबा पर घूमती है शक की सुई | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मुंबई हमलों को अंजाम देने के लिए शक की सुई लश्कर-ए-तैबा पर घूमती है. स्थानीय संगठन अपने बलबूते पर इतना बड़ा हमला नहीं कर सकते. हमले के संबंध में डेकन मुजाहिदीन का नाम सामने ज़रूर आया है, लेकिन नाम पर न जाएं तो बेहतर है. ये लोग अपने संगठन का नाम बदलते रहते हैं. लेकिन इन सभी की जड़ें पाकिस्तान में है. इनका संबंध अल क़ायदा से है. मेरा अनुभव है कि हमारी जाँच एजेंसियाँ इनसे निपटने में सक्षम हैं. लेकिन उन्हें काम करने नहीं दिया जाता. उनसे कहा जाता है कि ऐसा कोई काम नहीं करें जिससे वोट बैंक फिसल जाए. उच्चतम न्यायालय ने भी निर्देश दिए हैं, लेकिन आज तक केंद्र और राज्य सरकारों ने उनका पालन नहीं किया. ख़ुफ़िया पुलिस है ज़रूर, लेकिन उसका दुरूपयोग किया जा रहा है. हालात में फ़िलहाल सुधार नज़र नहीं आता. दिल्ली में हाल की मुठभेड़ को नेताओं ने फर्ज़ी बता दिया. यहाँ ख़ुफ़िया तंत्र की प्रशंसा होनी चाहिए थी, लेकिन उसकी निंदा की गई. ऐसा होना शर्मनाक है. दिक्कत यह है कि आप सोते को जगा सकते हैं, लेकिन यदि कोई जागते हुए भी सोता रहे तो कोई क्या कर सकता है. |
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