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पहले चरण के लिए चुनाव प्रचार थमा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान के लिए प्रचार का शोर बुधवार की शाम पाँच बजे थम गया. इस चरण में दक्षिण छत्तीसगढ़ के संवेदनशील बस्तर इलाक़े सहित कुल 10 ज़िलों की 39 सीटों पर 14 नवंबर को मतदान होना है. पहले चरण की इन सीटों के लिए 379 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं. छत्तीसगढ़ में कुल 90 विधानसभा क्षेत्र हैं और वहाँ शेष सीटों के लिए दूसरे चरण का मतदान 20 नवंबर को होगा.
मतगणना आठ दिसंबर को होगी. इस चरण में जिनके राजनीतिक भविष्य का फ़ैसला होना है उनमें मुख्यमंत्री रमन सिंह, नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा, विधानसभा अध्यक्ष प्रेमप्रकाश पांडे, विपक्ष के उपनेता भूपेश बघेल और मोतीलाल वोरा के बेटे अरुण वोरा शामिल हैं. इसके बाद अब उम्मीदवार मतदाताओं से घर-घर जाकर ही प्रचार कर सकेंगे. विशेष इंतज़ाम माओवादी या नक्सली हिंसा के चलते बस्तर को संवेदनशील इलाक़ा माना जाता है. नक्सलियों की चुनाव बहिष्कार की अपील ने इसे और भी संवेदनशील बना दिया है. बस्तर की सभी 12 सीटों पर पहले चरण में ही चुनाव होना है.
दंतेवाड़ा का दौरा करके लौटे बीबीसी संवाददाता सलमान रावी का कहना है कि बस्तर के क़स्बाई इलाक़ों में तो चुनावी प्रचार का शोर दिखाई देता है लेकिन सुदूर जंगल के इलाक़ों में सन्नाटा पसरा हुआ है और वहाँ चुनाव का कोई माहौल ही नहीं है. वहाँ सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं और कई संवेदनशील मतदान केंद्रों में चुनाव अधिकारियों को हेलीकॉप्टर से ले जाया जा रहा है. चुनाव आयोग ने बस्तर में मतदान का समय परिवर्तन करते हुए इसे सुबह सात बजे से दोपहर बाद तीन बजे तक ही सीमित कर दिया है जिससे कि सूर्यास्त से पहले ही मतपेटियों को सुरक्षित वहाँ से निकाला जा सके. मतदान का यह समय दंतेवाड़ा, कोंटा, बीजापुर, केशकाल, कोंडागाँव, बस्तर, जगदलपुर, चित्रकोट, नारायणपुर, अंतागढ़, भानुप्रतापपुर और कांकेर सीटों पर लागू होगा. समाचार एजेंसियों ने चुनाव आयोग के हवाले से बताया है कि शेष सभी सीटों पर मतदान का समय सुबह आठ बजे से शाम पाँच बजे तक रहेगा. मुक़ाबला राज्य में मुख्य मुक़ाबला सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी और विपक्षी दल कांग्रेस के बीच ही है. भाजपा जहाँ सभी 90 सीटों पर चुनाव लड़ रही है वहीं कांग्रेस ने तीन सीटें अपने सहयोगी दल नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के लिए छोड़ी है और वह 87 सीटों पर ही लड़ रही है.
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) भी इस बार छत्तीसगढ़ के चुनावों में ज़ोरशोर से उतरी है और जैसा कि राजनीतिक विश्लेषक बताते हैं कोई आधा दर्जन सीटों पर बसपा के उम्मीदवारों ने मुक़ाबले को त्रिकोणीय बना दिया है. जिन सीटों पर पहले चरण में चुनाव हो रहे हैं उनमें सबसे कम उम्मीदवार बस्तर की कोंटा सीट पर हैं. आंध्र प्रदेश की सीमा से लगे इस विधानसभा क्षेत्र में चार उम्मीदवार मैदान में हैं. जबकि दुर्ग ज़िले की वैशाली सीट पर सबसे अधिक 20 उम्मीदवार मैदान में हैं. कई सीटों पर भाजपा और कांग्रेस दोनों को ही अपने दलों के बाग़ियों की चुनौती झेलनी पड़ रही है. भाजपा ने जहाँ पाँच सालों के विकास कार्यों, ग़रीबों को तीन रुपए किलो चावल और किसानों के तीन प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध करवाने को अपनी उपलब्धि बताते हुए इसे चुनावी मुद्दा बनाया है. वहीँ कांग्रेस ने भाजपा शासन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं और ग़रीबों को दो रुपए किलो चावल देने और किसानो को ब्याज मुक्त ऋण देने का वादा किया है. |
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