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मेरे विभाग में भ्रष्टाचार हुआ: भाजपा मंत्री | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार के एक मंत्री ने बयान दिया है कि उनके विभाग में व्यापक पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है. विधान सभा चुनाव से ठीक पहले, और एक ऐसे समय जब विपक्ष सरकार पर घोर भ्रष्टाचार का आरोप लगा रहा है, एक मंत्री के इस बयान ने शिवराज सिंह चौहान सरकार की मुसीबतें और बढ़ा दी हैं. हालांकि सरकार के एक और वरिष्ठ मंत्री का कहना है कि बयान देने वाले मंत्री भ्रष्टाचार के दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की प्रक्रिया तेज़ करवाने लोकायुक्त के पास गए थे. राज्य में मुख्यमंत्री समेत कई वरिष्ठ मंत्री और उनके संबंधी भ्रष्टाचार के मामलों में जांच एजेंसियों, इनकम टैक्स विभाग की जाँच और अदालतों के घेरे में रहे हैं. 'अधिक भ्रष्ट' इस सरकार पर पिछली सरकारों के मुकाबले 'अधिक भ्रष्ट' होने का आरोप बार-बार लगता रहा है. इसी बीच राज्य के खाद्य नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण मंत्री अखंड प्रताप सिंह ने बयान दे दिया है कि उनके विभाग में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के राशन और खाद्यान वितरण और कुछ अन्य योजनाओं में भारी भ्रष्टाचार हुआ है. खाद्य मंत्री इस सिलसिले में विचार विमर्श के लिए लोकायुक्त कार्यालय भी गए. बाद में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा, "भ्रष्ट अधिकारी-कर्मचारियों के ख़िलाफ़ किस प्रकार कार्रवाई की जा सकती है इसी की सलाह लेने मैं लोक उपायुक्त के पास आया था." राजनीतिक नौटंकी एक कैबिनेट मंत्री के इस बयान को अलग-अलग तरीक़े से पेश किया जा रहा है. कुछ हलकों में कहा जा रहा है कि वर्तमान सरकार में भ्रष्टाचार इस क़दर बढ़ गया है कि कैबिनेट मंत्री भी उससे परेशान हैं. हालाँकि मुख्य विपक्षी राजनीतिक दल कांग्रेस के प्रवक्ता केके मिश्रा मंत्री जी की इस शिकायत को अपने बचाव के लिए बिछाई गयी बिसात और राजनीतिक नौटंकी के तौर पर देखते हैं. उन्होंने कहा, "वो इसलिए ऐसा कह रहे हैं क्योंकि पार्टी से उनको विधानसभा का टिकट न मिलना तय है." कांग्रेस नेता ने अखंड प्रताप सिंह के ऊपर कई मामलों में पैसों के लेन-देन का भी आरोप लगाया है. लेकिन मध्यप्रदेश सरकार में वरिष्ठ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय कहते हैं कि खाद्य आपूर्ति मंत्री ने लोकायुक्त से सिर्फ़ जाँच प्रक्रिया को तेज़ करने की मांग की थी ताकि चुनाव से पहले पूरा मामला साफ़ हो जाए. पार्टी की चिंता हालाँकि इस मामले पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी थोड़ी चिंतित ज़रूर है. पार्टी के एक शीर्ष नेता ने इसे गंभीर मामला बताया है और उनके अनुसार विपक्ष इसका फ़ायदा उठाने की कोशिश ज़रूर करेगा. मध्यप्रदेश कि वर्तमान सरकार का कथित भ्रष्टाचार एक अहम राजनीतिक मुद्दा रहा है और खरगौन और बैतुल लोकसभा उप-चुनाओं में पार्टी की हार की एक वजह यह भी आंकी गई थी. जानकारों की राय में पार्टी भ्रष्टाचार के मामले पर लगभग 50 मौजूदा विधायकों को टिकट देने से मना कर सकती है. वहाँ नवंबर में चुनाव होने हैं. |
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