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शनिवार, 10 फ़रवरी, 2007 को 08:26 GMT तक के समाचार
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चुनाव प्रचार भी बारात की तरह

प्रचार करते जगवीर सिंह
जगवीर सिंह ने चुनाव लड़ने के लिए ज़मीन-जायदाद रहन रखा है
सजीली घोड़ी, उस पर सज-धज के साथ बैठा युवक,बैंड पार्टी,लोगों का हुजूम और पकवानों की दावत.

ये किसी बारात और विवाह समारोह का वर्णन नहीं बल्कि एक अनूठे चुनाव-प्रचार की एक झलक है.

उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव में लक्सर विधानसभा क्षेत्र के निर्दलीय प्रत्याशी जगवीर सिंह चौहान इसी अंदाज में अपना प्रचार अभियान चला रहे हैं.

विधायक बनने की ये दीवानगी उन पर कुछ इस क़दर हावी हो गई है या कहें कि विधायक बनने का ऐसा भूत सवार हुआ है कि उन्होंने इस तामझाम और शान-शौकत के लिये अपने खेत-खलिहान और जायदाद तक रहन रख दिये हैं.

हर सुबह जगवीर सिंह किराए पर ली गई घोड़ी और ख़ुद को सजा-सँवार कर, बैंड पार्टी के साथ चुनाव प्रचार के लिये निकल पड़ते हैं.

 आखिर लोग मेरा नमक खा रहे हैं तो उसका सम्मान तो करेंगे ही
जगवीर सिंह

लक्सर की जिन गलियों से होकर उनका काफिला निकलता है बच्चे-बूढ़े उनके साथ हो लेते हैं और महिलाएँ देहरी की ओट से इस नजारे को देखती हैं.

दिनभर हर नुक्कड़ चौराहे पर और कभी-कभी घर-घर जाकर वो अपने लिये वोट मांगते हैं.

शाम होते ही शामियाना तन जाता है और भांति-भांति के लज़ीज़ व्यंजन से लोगों की आवभगत की जाती है जिसमें तंदूरी रोटी भी पकती है और मुर्ग-मुसल्लम भी.

चर्चा में

38 साल के जगवीर सिंह कल तक अपने इलाक़े गंगदासपुर के एक नामालूम से किसान थे लेकिन आज आकर्षण का केंद्र हैं.

कोई कौतूहल से कर रहा है तो कोई मज़ाक से तो कोई मसखरेपन से कर रहा है, लेकिन सच्चाई ये है कि इस अनोखे ढंग के कारण उनके चुनाव प्रचार की चर्चा हर कोई कर रहा है.

प्रचार करते जगवीर सिंह
जगवीर इससे पहले खेती करते थे

लक्सर के स्थानीय निवासी लोकेश शर्मा कहते हैं, ”जितने दिन ये प्रचार होना है हम भी मुफ़्त की दावत उड़ा रहे हैं. बाकी वोट मिले तो जगवीर एमएलए बन भी सकता है.”

लेकिन जगवीर सिंह को पूरा यकीन है कि उनका चुनाव प्रचार रंग लाएगा, और मेहनत बेकार नहीं जाएगी.

अपनी उम्मीदवारी को लेकर वो गंभीर हैं, "लोग अब बड़ी पार्टियों से ऊब चुके हैं क्योंकि इनके नेता एक बार जीतने के बाद कभी मुड़कर दोबारा गांव की ओर रूख नहीं करते."

वोट उनको ज़रूर मिलेगा इसके समर्थन में उनके अपने तर्क हैं, "आखिर लोग मेरा नमक खा रहे हैं तो उसका सम्मान तो करेंगे ही."

अपने प्रचार के तरीके पर वो कहते हैं, "कोई जीप से आता है तो कोई हेलीकॉप्टर से भी, फिर घोड़ी तो हमारी परंपरा में भी है और इतिहास में."

कुछ लोग कहते हैं कि जिस तरह से वो खुलेआम लोगों को दावत दे रहे हैं एक तरह से उनके खिलाफ आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन का मामला बनता है लेकिन चुनाव मैदान के बड़े खिलाड़ियों में से किसी का ध्यान अब तक इस ओर नहीं गया है.

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