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जंगल के बच्चों का अनोखा आशियाना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
माता-पिता को खो चुके बच्चों को गुवाहाटी के डॉक्टर गोगोई अपने घर ले जाते हैं. वो बड़े होने तक उनकी परवरिश करते हैं. अनाथ बच्चों का लालन-पालन करने वाले डा. गोगोई इस मायने में अनोखे हैं कि इनके घर में आदमी नहीं बल्कि जंगली जानवरों के बच्चों को आश्रय मिलता है. असम के गुवाहाटी शहर में डॉक्टर विजय गोगोई के निवास पर किसी भी समय कोई न कोई जंगली जानवर खेलता हुआ मिल जाता है. जब यह संवाददाता उनके पास गया तो वे एक तेंदुए के बच्चे को गोद में खिला रहे थे. गोगोई पेशे से पशु चिकित्सक हैं और किसी भी जानवर को लाने और पालने के लिए अधिकृत हैं. जब कोई जंतु माता प्रसव के समय दम तोड़ देती है तो उसके बेसहारा बच्चे की परवरिश की जिम्मेदारी डा. गोगोई सहर्ष उठा लेते हैं. उनके इस काम में उनकी पत्नी भी पूरी तरह सहयोग करती हैं. डा. गोगोई ने हाल ही में एक बंदर को पाल-पोसकर एक साल का किया और पहले जन्मदिन पर उसे समारोहपूर्वक चिड़ियाघर को सौंप दिया गया. परवरिश ऐसे अनाथ जानवरों की परवरिश में गोगोई दंपत्ति पूरे मनोयोग से डूब जाता है मानों वे उनके अपने बच्चे हों. खेलते-शरारत करते इन जानवरों के बीच गोगोई दंपत्ति दिन भर व्यस्त रहता है. डा. गोगोई ने अब तक 21 जानवरों को नई ज़िंदगी दी है. इनमें से कुछ को उनकी मां छोडकर चली गई थी और कुछ जन्म के बाद जल्दी ही मां के साये से महरूम हो गए थे. गोगोई दंपत्ति इन शिशुओं को तब तक पालता है जब तक वे अपना खयाल खुद रखने लायक नहीं हो जाते. मानव के साथ पले ऐसे जानवरों को जंगल में छोडने की इज़ाज़त नहीं है इसलिए इन्हें गुवाहाटी के चिड़ियाघर को ही सौंपना पड़ता है. अपने पाले शिशुओं को चिड़ियाघर के पिंजडे में भेजने की बात करते हुए डा. गोगोई की आंखें भर आती हैं. डा. गोगोई कहते हैं,'' जिन्हें बच्चों की तरह पाला उन्हें आज पिंजड़े में देखना अत्यंत कष्टदायक है. किसी-किसी के साथ तो हमारे बहुत ही भावनात्मक रिश्ते बन चुके हैं.'' डा. गोगोई ने अपने पाले जानवरों की वीडियो शूटिंग कर रखी है. जब भी अपने किसी तेंदुए, जंगली सूअर या हिरण के बच्चे की याद आती है, वे वीडियो देखकर संतोष कर लेते हैं. श्रीमती गोगोई बताती हैं कि ये शिशु खेलना बहुत पसंद करते हैं. अलग-अलग जानवरों के लिए अलग-अलग किस्म के नरम खिलौने घर पर लाकर रखे गए हैं विशेषकर तेंदुए के बच्चों को पालने में काफ़ी जतन करना पड़ता है. डा. गोगोई को उनकी विशेष सेवा के लिए राज्य के वन विभाग ने पुरस्कृत भी किया है. |
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