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'डीएसपी' मोती की नीलामी टली | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
छत्तीसगढ़ में सात वर्षों तक रेलवे सुरक्षा बल की नौकरी करने वाला एक अफ़सर बीमार क्या पड़ा, उसकी तो जैसी शामत ही आ गई. विभाग ने उस अफ़सर को नौकरी से हटाने तक का फ़ैसला कर डाला. बात इतने पर भी ख़त्म नहीं हुई और तय किया गया कि इस अफ़सर को 500 रुपए की शुरुआती बोली लगाकर नीलाम कर दिया जाए. रेलवे सुरक्षा बल का यह अधिकारी कोई इंसान नहीं बल्कि डाबरमैन पिंचर नस्ल का एक कुत्ता है. हालांकि बुधवार को जब इस अफ़सर कुत्ते की नीलामी की बोली लगने वाली थी तो एक संस्था ने इस पर आपत्ति दर्ज करा दी और अंतिम क्षणों में उसकी नीलामी रुक गई. नीलामी तो टल गई लेकिन अब रेलवे सुरक्षा बल यानी आरपीएफ़ इस बात को लेकर परेशान है कि इस अफ़सर का किया क्या जाए. विशेष अधिकारी देशभर के पुलिस विभागों में सुरक्षा और आपराधिक अनुसंधान के लिए उच्च कोटि के कुत्तों की सहायता ली जाती है. विशेष प्रशिक्षण प्राप्त ये कुत्ते प्रतिबंधित नशीले पदार्थ और विस्फोटक के साथ-साथ घटनास्थल पर अपराधियों की गंध सूँघकर अपराधी का पता लगाने में मदद करते हैं. पुलिस विभाग में इन कुत्तों की रैंकिंग की जाती है और उन्हें पद दिया जाता है. ज़ाहिर है, पद के साथ-साथ इन्हें उसी पद के अनुरूप सुविधाएं भी दी जाती हैं. अब मोती को ही ले लीजिए, 'डीएसपी' के समकक्ष रैंकिंग वाला मोती भले ही आरपीएफ़ में सेवारत हो, लेकिन छत्तीसगढ़ में इस तरह के प्रशिक्षित कुत्तों का अभाव होने के कारण रेलवे के साथ-साथ बिलासपुर, रायगढ़, जशपुर, सरगुजा, कोरिया और जांजगीर-चांपा ज़िले की पुलिस के लिए भी आपराधिक मामलों को सुलझाने के लिए मोती ही एकमात्र सहारा रहा है. एक के बाद एक मामले सुलझाने वाले मोती को रेलवे सुरक्षा बल ने किसी बड़े अफ़सर से कम सुविधाएँ नहीं दी हैं. सुविधाएँ भी ऐसी कि बढ़िया खाना-पीना, रहने के लिए शानदार कमरा और वातानुकुलित गाड़ियों में यात्रा की पात्रता देख कर पुलिस के दूसरे अफ़सरों को ईर्ष्या होने लग जाए. मोती की तीमारदारी के लिए एक हवालदार, एक सिपाही, एक इंचार्ज और एक सफाई कर्मचारी हमेशा ड्यूटी में रहते हैं. सुख भरे दिन बीते... अब मोती के लिए यह शानोशौकत का दौर ख़त्म हो रहा है.
कुछ महीने पहले मोती की तबीयत ख़राब हुई और हर पखवाड़े मोती की जांच करने वाले डाक्टरों ने घोषित कर दिया कि आरपीएफ़ का अफ़सर मोती पहले की तरह चुस्त-दुरुस्त नहीं है. इसके बाद आरपीएफ़ ने तय किया कि मोती को सेवानिवृत्ति दे दी जाए. आरपीएफ़ ने मोती को 28 जून को नीलाम करने का निर्णय लिया. क़ीमत रखी गई पाँच सौ रुपए. मोती की नीलामी की ख़बर जब राज्य के पशु प्रेमियों को हुई तो उन्होंने आरपीएफ़ के निर्णय का विरोध करना शुरु कर दिया. मेनका गांधी की संस्था पीपुल्स फॉर एनीमल से संबद्ध राकेश मिश्रा कहते हैं, "इस तरह के कुत्ते एक ही मालिक की बात मानने के अभ्यस्त रहते हैं. ऐसे में अगर मोती को कोई ख़रीद ले और उसे आदेश दे तो मोती विद्रोह कर सकता है. इस स्थिति में मोती के साथ क्रूरता बरती जा सकती है." पशु प्रेमियों का तर्क था कि जब किसी आदमी को इस पद से सेवानिवृत किया जाता है तो उसे लाखों रुपए के साथ आजीवन पेंशन मिलती है लेकिन इतने वर्षों तक देश की सेवा करने के बाद मोती को नीलाम किया जा रहा है. मोती का अहोदा डीएसपी यानी उप पुलिस अधीक्षक के समकक्ष तय किया गया है लेकिन नीलामी को लेकर खड़े हुए विवाद के बाद रेलवे सुरक्षा बल ने ऐसी किसी रैंकिंग से ही इनकार कर दिया. पद पर सवाल दक्षिण-पूर्व मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी अंकुश गुप्ता कहते हैं, "मोती को एक राजपत्रित अधिकारी की सुविधाएँ दी जाती हैं और उस पर होने वाला ख़र्च भी उसी तरह का है. रेलवे में काम करने वाले कुत्तों में वरिष्ठता भी निर्धारित होती है लेकिन घोषित रूप से इन्हें कोई पदनाम नहीं दिया जाता." दूसरी ओर ज़िला पुलिस के रक्षित निरीक्षक प्रमोद कुमार कहते हैं, "कुत्तों को सुविधाएँ भी मिलती हैं और उनकी रैंकिंग भी होती है. कुछ महीने पहले ही बिलासपुर ज़िले के कुत्तों के दस्ते में डॉली नाम की एक कुतिया को बतौर इंस्पेक्टर शामिल किया गया है." बहरहाल मोती को एक सामान्य कुत्ता बताने की रेलवे सुरक्षा बल की कोशिशों के बाद भी विरोध के स्वर नहीं थमे. पीपुल्स फॉर एनीमल ने इस मामले में पहल की और मामला अब रेल मंत्रालय तक जा पहुँचा है. आख़िरकार एक कुत्ते की नीलामी को लेकर खड़े हुए इस 'राष्ट्रीय विवाद' के बाद दक्षिण-पूर्व मध्य रेलवे ने अख़बारों में विज्ञापन देकर मोती की नीलामी को फ़िलहाल टालने के निर्देश दे दिए हैं. पर रेलवे सुरक्षा बल के सामने अब सबसे बड़ा संकट यही है कि इस बीमार अफ़सर के रख-रखाव और भोजन में होने वाला ख़र्च किस मद से दिया जाए? | इससे जुड़ी ख़बरें नक्सलियों से बचाएंगे आवारा कुत्ते31 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस कुत्ते को मार डाला गिलहरियों ने02 दिसंबर, 2005 | पहला पन्ना महारानी को कुत्ते की मौत का शोक24 दिसंबर, 2003 | पहला पन्ना अब कुत्ते की बारी29 सितंबर, 2002 | पहला पन्ना पालतू जानवर कम करे तनाव28 सितंबर, 2002 | पहला पन्ना कुतिया को बचाने में हज़ारों ख़र्च26 अप्रैल, 2002 | पहला पन्ना तोता भौंकता है, कुत्ता साहब है11 फ़रवरी, 2004 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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