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बुधवार, 07 फ़रवरी, 2007 को 04:06 GMT तक के समाचार
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टिहरी पुनर्वास का मामला और गरमाया

टिहरी
टिहरी क्षेत्र में छह विधानसभा सीटें आती हैं
विधानसभा चुनाव के दौरान आए सर्वोच्च न्यायालय के एक फ़ैसले ने टिहरी बाँध के पुनर्वास के पहले से ही गर्म मसले को एक बार और हवा दे दी है.

दरअसल सर्वोच्च न्यायालय ने एक महत्तवपूर्ण फैसले में मंगलवार को उत्तराखंड सरकार को नोटिस जारी करके टिहरी बांध के सभी विस्थपितों का 31 मार्च तक पुनर्वास करने के लिये कहा है.

सर्वोच्च न्यायालय के इस निर्णय को टिहरी बांध के विस्थापितों को एक बड़ी राहत पहुँचाने वाला माना जा रहा है.

इसके साथ ही तय हो गया है कि विधानसभा के चुनावों में और टिहरी संसदीय सीट के उपचुनावों में विस्थापन अपने आपमें एक बड़ा मुद्दा है.

अदालत ने ये फैसला टिहरी के कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री किशोर उपाध्याय की याचिका पर सुनवाई के दौरान सुनाया है जिन्होंने अपनी ही सरकार के ख़िलाफ़ अदालत का दरवाज़ा खटखटाया था.

किशोर उपाध्याय जो इस बार भी कांग्रेस के प्रत्याशी हैं, का कहना है कि विस्थापितों का हित सर्वोपरि है और उनके समुचित पुनर्वास के बिना बाँध का काम आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए.

उनका आरोप है कि बांध के जलाशय में पानी भरने का डर दिखाकर लोगों को घर-बार छोड़ने के लिये मजबूर किया गया.

टिहरी जिले में 6 विधानसभा सीटें हैं और पिछली बार ये सभी कांग्रेस को मिली थीं लेकिन इस बार कांग्रेस को विस्थापन पर सफाई देनी पड़ रही है क्योंकि सीधे प्रभावित होने के अलावा कई क्षेत्र हैं जिनका संपर्क और आर्थिकी बांध बनने से गड्ड-मड्ड हो गये हैं.

उधर विपक्षी दल विस्थापन से जुड़ी लोगों की शिकायत को भुनाने की कोशिश में हैं और मानते हैं कि अदालत के इस ताज़ा फ़ैसले से उनका पक्ष मज़बूत हुआ है.

बाँध

उत्तराखंड के टिहरी जिले में भागीरथी और भिलंगना नदियों के संगम पर बना टिहरी बांध एशिया का सबसे ऊंचा बांध है.

फ़िलहाल बांध का पहला चरण पूरा हो चुका है और इससे 250 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है.

लेकिन यहाँ के लोगों का मानना है कि इस बांध की भारी कीमत चुकानी पड़ी है. इसका कारण शायद यह भी है कि पर्यावरण, पुनर्वास और सुरक्षा जैसे मसलों को लेकर ये हमेशा विवादों में रहा है.

 अगर सर्वोच्च न्यायलय ने एक नया निर्देश दिया है तो विस्थापित की परिभाषा भी फिर से तय करनी होगी क्योंकि इसके पहले भी अदालत के निर्देशों के तहत ही काम चल रहा है
उमाकांत उनियाल, सरकारी वकील

बाँध से बनी 42 वर्ग किलोमीटर की विशाल झील में न केवल 40 हज़ार की आबादीवाला टिहरी शहर डूब चुका है बल्कि इससे 125 गांव भी विस्थापित हो रहे हैं और सैकड़ों हेक्टेयर खेतिहर जमीन जलमग्न हो रही है.

अब तक के पुनर्वास कार्यक्रम और सरकारी दावों के अनुसार विस्थापितों और उनके परिवार को जमीन के बदले जमीन. नौकरी, मकान और पैसे देकर उन्हें समुचित मुआवज़ा दिया जा चुका है. इस काम में अब तक 1000 करोड़ रू खर्च किये जा चुके हैं.

राज्य सरकार की ओर से अदालत में इस मामले को देख रहे महाधिवक्ता उमाकांत उनियाल कहते हैं, "टिहरी के इलाके में 760 मीटर की ऊंचाई तक जहां जलभराव हुआ है उन इलाकों के लोगों को पुनर्वासित किया जा चुका है और पुनर्वास नीति में ही ये तय है कि जैसे-जैसे जल भरेगा और लोग हटाए जाएँगे उन्हें मुआवज़ा दिया जाएगा."

वह कहते हैं, "अगर सर्वोच्च न्यायलय ने एक नया निर्देश दिया है तो विस्थापित की परिभाषा भी फिर से तय करनी होगी क्योंकि इसके पहले भी अदालत के निर्देशों के तहत ही काम चल रहा है."

बांध से 810 मीटर की ऊंचाई तक के क्षेत्र डूबेंगे.

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