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प्रदेश का अभूतपूर्व विकास हुआ है: तिवारी
उत्तरांचल के मुख्यमंत्री नारायणदत्त तिवारी साधनों की कमी को राज्य के विकास का एक बड़ा रोड़ा बताते हुए डेढ़ साल के अपने कार्यकाल को विकास के कामों के लिए अभूतपूर्व बताते हैं. मगर मुख्य विपक्षी दल उनके इन दावों को खोखला बता रहा है. इस राज्य को बने एक नवंबर को तीन साल पूरे हो रहे हैं और उस दौर में राज्य ने तीन मुख्यमंत्री देखे हैं. नए बने तीनों राज्यों में से अभी तक उत्तरांचल में ही चुनाव हुए हैं और वहाँ गठन के समय सत्ता में रही भारतीय जनता पार्टी को चुनाव में मुँह की खानी पड़ी थी. चुनाव में विजयी रही कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश की कमान कई बार सँभाल चुके नारायणदत्त तिवारी को उत्तराखंड में सरकार का मुखिया बनाया. तिवारी कार्यकाल के दौरान साधनों की कमी का रोना रोते हैं और उनका कहना है कि प्रदेश के पास पूरे साधन नहीं थे और ग्यारहवें वित्त आयोग में भी प्रदेश के ग़ैर-योजना ख़र्च के लिए पैसा नहीं रखा गया था.
तिवारी के अनुसार बारहवाँ वित्त आयोग भी वर्ष 2005 के बाद के लिए ही पैसा देगा. वह राज्य में बिजली की स्थित सुधारने का दावा करते हुए कहते हैं, "हमारी पार्टी ने प्रदेश में चौबीसों घंटे बिजली मुहैया कराने का एलान किया था और आज लगभग चौबीस घंटे बिजली आ रही है." मुख्यमंत्री का ये भी दावा है कि उद्योग जगत भी प्रदेश की ओर आकर्षित हो रहा है. लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरने के बारे में उनका कहना है, "मैं कभी नहीं कहूँगा कि मैं खरा उतरा हूँ. मैं कोशिश कर रहा हूँ." तिवारी का दावा है कि राज्य में अभूतपूर्व विकास हुआ है और भ्रष्टाचार के मामले सामने आते ही तुरंत उस पर कार्रवाई हुई है. पार्टी में खींचतान को वह प्रजातंत्र का एक लक्षण मानते हैं मगर उससे विकास के काम किसी तरह प्रभावित हो रहे हैं उससे उन्हें इनकार है. विपक्षी दावे मगर विपक्ष के नेता और पहले मुख्यमंत्री नित्यानंद स्वामी के बाद मुख्यमंत्री की कुर्सी सँभालने वाले भगत सिंह कोश्यारी का कहना है, "सरकार अपने अंतर्द्वन्द्व के कारण लोगों की आकाँक्षाएँ पूरी नहीं कर पाई है." वह कहते हैं कि इस कार्यकाल में लोगों का सरकार से विश्वास उठ गया है. कोश्यारी के अनुसार राज्य के गठन के पहले डेढ़ साल में काम हुआ तो लोगों की उम्मीदें बढ़ गईं थीं मगर इन डेढ़ वर्षों में कोई काम नहीं हुआ है. उनके अनुसार इस दौरान भ्रष्टाचार के कई मामले सामने आए हैं और लोगों की रोज़ग़ार की उम्मीदें भी पूरी नहीं हुई हैं. |
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