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टिहरी में सुरंग धँसने से 12 लोग मरे | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तरांचल राज्य के टिहरी ज़िले में एक सुरंग के धंस जाने से कम-से-कम 12 लोग मारे गए हैं. ये दुर्घटना टिहरी के उस बाँध के निर्माण की जगह हुई जिसे लेकर काफ़ी विवाद हुआ था. टिहरी के ज़िलाधिकारी पुनीत कौशल ने बीबीसी को बताया कि दुर्घटना के वक़्त उस सुरंग में 80 मज़दूर काम कर रहे थे. उन्होंने बताया कि ये मज़दूर सुरंग में कुछ काम कर रहे थे जब कुछ बड़ी चट्टानें सुरंग पर गिरी जिससे वह धंस गई. अधिकतर लोगों को मलबे से बाहर निकाल लिया गया है मगर कई गंभीर हैं और कुछ लोगों को निकालने के प्रयास चल रहे हैं. केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने इस घटना की जाँच के आदेश दे दिए हैं. विवादास्पद बाँध टिहरी बाँध के निर्माण को लेकर बड़ा भारी विवाद हुआ था. पर्यावरणवादियों की दलील थी कि ये बाँध ख़तरनाक है क्योंकि जिस क्षेत्र में इसे बनाया जा रहा है वह भूकंप की आशंका वाला क्षेत्र है. 261 मीटर ऊँचा टिहरी बाँध एशिया का सबसे ऊँचा बाँध माना जाता है. तीन साल पहले भी यहाँ ऐसा ही एक हादसा हुआ था. तब एक सुरंग के धंसने से 16 मज़दूर ज़िंदा दफ़न हो गए थे. टिहरी परियोजना से 24000 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जाना है. मगर टिहरी परियोजना के कारण क्षेत्र में 42 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र की एक बड़ी झील बन रही है जिसके कारण पूरा टेहरी शहर और लगभग 125 गाँव डूब गए हैं. इस परियोजना के कारण लगभग एक लाख लोग विस्थापित हो गए हैं. |
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