|
श्रीलंका में 'सेना जीत के क़रीब' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंका के रक्षा सचिव गोताभाया राजपक्षे ने दावा किया है कि तमिल विद्रोहियों के ख़िलाफ़ चल रही लड़ाई में सेना जीत के क़रीब पहुँच गई है. बीबीसी को दिए एक साक्षात्कार में राजपक्षे ने कहा, "सभी क्षेत्रों में हम बेहतर हैं, चाहे वह थल हो,समुद्र हो या वायु." उन्होंने कहा, "उनकी तुलना में हमारे सैनिकों की संख्या अधिक है, हमारे पास हथियार अधिक हैं. हमें विश्वास है कि हम जीत सकते हैं और हम इसे जल्दी ख़त्म करना चाहते हैं." तमिल विद्रोहियों और श्रीलंकाई सेना के बीच चल रही लड़ाई दक्षिण एशिया की सबसे बड़ी लड़ाई है और इसमें अब तक 70 हज़ार लोगों की जान जा चुकी है. वर्ष 2006 के मध्य में तमिल विद्रोहियों और सरकार के बीच संघर्ष विराम टूट गया था और इसके बाद सेना ने देश के पूर्वी भाग से विद्रोहियों को खदेड़ दिया है. इसके बाद सेना ने देश के उत्तरी हिस्से में कार्रवाई में ज़ोर लगा दिया है. उत्तरी इलाक़ा तमिल विद्रोहियों के नियंत्रण में रहा है और वे इसे तमिलों के लिए अलग देश बनाने की माँग करते रहे हैं. श्रीलंका के राष्ट्रपति महेंद्रा राजपक्षे के भाई गोताभाई राजपक्षे का कहना है कि सेना तेज़ी से आगे बढ़ रही है और अब वह तमिल विद्रोहियों के मुख्यालय किलीनोच्ची से केवल 4.5 किलोमीटर दूर रह गई है. दावा सरकार ने उन इलाक़ों में पत्रकारों के जाने पर रोक लगा रखी है जहाँ युद्ध चल रहा है और इसके चलते सेना और सरकार के दावों का स्वतंत्र रुप से पुष्टि कर पाना संभव नहीं है. जहाँ सेना ने कार्रवाई की है वहाँ से नागरिकों को घर-बार छोड़कर भागना पड़ा है. सहायता एजेंसियों का कहना है कि दो लाख से सवा दो लाख विस्थापित लोग किलीनोच्ची और मुलातिवू ज़िलों में रह रहे हैं. इस महीने की शुरुआत में संयुक्त राष्ट्र और दूसरी सहायता एजेंसी के कार्यकर्ताओं ने किलीनोच्ची छोड़ने का निर्णय लिया था. सरकार ने सहायता एजेंसियों को उन इलाक़ों से निकल जाने की चेतावनी देते हुए कहा था कि सरकार के लिए उनकी सुरक्षा की गारंटी देना संभव नहीं होगा. रक्षा सचिव का कहना है, "चूंकि सेना किलीनोच्ची के क़रीब पहुँच चुकी है इसलिए हम नहीं चाहते कि सहायता एजेंसी के लोग लड़ाई के बीच फँस जाएँ." राजपक्षे ने कोलंबो में कड़ी सुरक्षा को उचित ठहराते हुए कहा है कि यह विद्रोहियों के बम हमलों को रोकने के लिए है. उधर तमिल नागरिकों ने आरोप लगाया है कि उनकी तलाशी ली जा रही है, प्रताड़ित किया जा रहा है और अक्सर उन्हें हिरासत में लिया जा रहा है. | इससे जुड़ी ख़बरें उत्तरी श्रीलंका से संयुक्त राष्ट्र का हटना शुरु16 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस वायु सेना ने तमिल अड्डे पर बम बरसाए10 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस विद्रोहियों का विमान मार गिराने का दावा09 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस श्रीलंका में संघर्ष, 'कई विद्रोही' मरे01 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस प्रमुख ठिकाने पर क़ब्ज़े का दावा17 अगस्त, 2008 | भारत और पड़ोस 'आतंकवाद क्षेत्र के लिए सबसे बड़ा ख़तरा'02 अगस्त, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||