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आतंकवाद: नए क़ानून की सिफ़ारिश | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
केंद्र सरकार के रवैये के विपरीत सरकार के एक आयोग ने आतंकवाद से निपटने के लिए नया क़ानून बनाने की सिफ़ारिश की है और कहा है कि मौजूदा क़ानून इस समस्या से निपटने के लिए पर्याप्त नहीं हैं. सरकार द्वारा गठित दूसरे प्रशासनिक सुधार आयोग ( एआरसी) की आतंकवाद से निपटने के मुद्दे पर दी गई आठवीं रिपोर्ट में कहा गया है कि आतंकवाद का सामना करने के लिए एक नए और प्रभावी क़ानूनी ढांचे की ज़रुरत है. दिल्ली में एक प्रेस कांफ्रेंस में 185 पन्नों की रिपोर्ट जारी करते हुए आयोग के चेयरमैन वीरप्पा मोयली का मानना था कि मौजूदा क़ानून आतंकवाद की समस्या से निपटने कि एल पर्याप्त नहीं हैं और नए क़ानून में इसके दुरुपयोग को रोकने की भी व्यवस्था होगी. हालांकि केंद्र सरकार अब तक कहती रही है कि आतंकवाद से निपटने के लिए किसी नए क़ानून की ज़रुरत नहीं है और मौजूदा क़ानून ही पर्याप्त हैं. मोयली का कहना था कि नया क़ानून अलग से नहीं बनाया जाएगा लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून 1980 ( रासुका) में ही आतंकवाद से लड़ाई के लिए एक विशेष अध्याय जोड़ दिया जाएगा. नई व्यवस्था के तहत रासुका में पकड़े गए लोगों को ज़मानत नहीं मिल सकेगी. मोयली ने विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी के इन आरोपों को ख़ारिज़ कर दिया कि केंद्र सरकार आतंकवाद के मुद्दे पर नरम रही है. उनका कहना था विपक्षी दल की पोटा लाने की मांग नाजायज़ है क्योंकि इसका दुरुपयोग हुआ था. आयोग की रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि आतंकवाद से जुड़े मुद्दों को सुलझाने के लिए सीबीआई में ही एक शाखा बना दी जाए और साथ ही ऐसे मामलों के लिए स्पेशल फॉस्ट ट्रैक कोर्ट भी बनाए जाएं. उल्लेखनीय है कि सरकार कहती रही है कि आतंकवाद से निपटने के लिए किसी नए क़ानून की ज़रुरत नही है. | इससे जुड़ी ख़बरें दिल्ली पुलिस का पहला एहतियाती क़दम14 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस फ़िज़ा कुछ सहमी सहमी है14 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस '...उनकी भी आस नहीं है बाबू'15 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस बचने की कोशिश विस्फोट तक खींच लाई15 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस 'आलाकमान का समर्थन हासिल'15 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस दिल्ली पुलिस ने स्केच जारी किए16 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस 'पार्टी नेतृत्व कहे तो पद छोड़ दूँगा'16 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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