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प्रचंड की मनमोहन सिंह से मुलाक़ात | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल यानि प्रचंड सोमवार को भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ व्यापक मुद्दों पर बातचीत करेंगे. विशेषज्ञों का कहना है कि प्रचंड की यात्रा के दौरान नेपाल और भारत के संबंधों पर अहम बातचीत होगी. इनमें 1950 की द्विपक्षीय व्यापार और पारगमन संधि की समीक्षा शामिल है. नेपाल के प्रधानमंत्री इसके स्थान पर नई संधि के पक्ष में है. नेपाल में राजशाही समाप्त होने के बाद प्रचंड ने कहा था कि वो मानते हैं कि 1950 संधि के स्थान पर नई संधि होनी चाहिए. नई नेपाली सरकार का मानना है कि संधि नेपाल के अनुकूल नहीं है. नेपाल मामलों के विशेषज्ञ आईएन मुखर्जी ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि नेपाल 1950 की संधि में कुछ परिवर्तन करना चाहता है. उनका कहना था कि नेपाल की भारत पर आर्थिक निर्भरता इतनी है कि वह चाहकर भी उससे दूर नहीं हो सकता है. नदियों पर भी बातचीत दोनों पक्ष 1954 के कोसी नदी समझौते पर भी विचार-विमर्श करेंगे जो भारत-नेपाल में बहनेवाली साझा नदियों के पानी के उपयोग से संबंधित है. ग़ौरतलब है कि कोसी नदी के तटबंध टूटने के बाद बिहार में आई बाढ़ के बाद ऐसी मांगें उठ रही हैं कि संधि का उचित कार्यान्वयन होना चाहिए ताकि ऐसी स्थिति से बचा जा सके. प्रधानमंत्री बनने के बाद प्रचंड ने सबसे पहले चीन की यात्रा की थी. इसको लेकर सवाल उठने लगे थे कि क्या नेपाल का झुकाव चीन की ओर हो रहा है. इसके बाद प्रचंड को स्पष्टीकरण देना पड़ा था कि उनकी चीन यात्रा सिर्फ़ बीजिंग ओलंपिक के लिए थी और उनकी पहली राजनीतिक यात्रा भारत की होगी. इसके पहले प्रधानमंत्री प्रचंड रविवार को दिल्ली पहुँचे. हवाई अड्डे पर भारत के गृह राज्यमंत्री शकील अहमद ने उनकी अगवानी की. वो पाँच दिनों की भारत यात्रा पर हैं. |
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