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नेपाल में पहले राष्ट्रपति का चुनाव | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल में आज संविधान सभा देश के पहले राष्ट्रपति का चुनाव करेगी. देश की तीनों प्रमुख पार्टियों ने अपने-अपने उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है. मतदान से पहले राजनीतिक खींचतान और असमंजस का सिलसिला जारी है. पहले ऐसे संकेत मिले थे कि दक्षिणी नेपाल की मधेशी पार्टियों और माओवादियों के बीच नव जनवादी मंच के नेता रामराजा प्रसाद सिंह के नाम पर सहमति हो गई है. लेकिन अब समीकरण गड़बड़ाते दिख रहे हैं, माओवादियों के उम्मीदवार रामराजा प्रसाद सिंह को समर्थन देने के बदले में मधेशी नेताओं ने उप राष्ट्रपति पद पर अपने उम्मीदवार को बिठाने का समझौता किया था. काठमांडू से मिली ताज़ा ख़बरों के मुताबिक़, माओवादी नेता उप राष्ट्रपति पद के मधेशी उम्मीदवार परमानंद झा को समर्थन देने में टालमटोल के संकेत दे रहे हैं. बीबीसी नेपाली सेवा से एक बातचीत में मधेशी जनाधिकार फ़ोरम के संयोजक उपेंद्र यादव ने कहा, "अगर माओवादी हमारे उप राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को समर्थन नहीं देंगे तो हम उनके राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को क्यों समर्थन देंगे, वे लोग अपने वादे से पलट रहे हैं." इससे पहले माओवादी नेताओं का कहना है कि उनके पास रामराजा प्रसाद के नाम पर सहमति देने के अलावा कोई विकल्प नहीं था, प्रसाद एक छोटी पार्टी के नेता हैं और काफ़ी निष्पक्ष छवि है. माओवादियों के शीर्ष नेता प्रचंड ने कहा, "हम गिरिजा प्रसाद कोइराला को राष्ट्रपति नहीं बनाना चाहते थे, हम कोई नया चेहरा चाहते थे, रामराजा प्रसाद बिल्कुल सही उम्मीदवार हैं." माओवादियों और दक्षिण नेपाल में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों (मधेशियों) के बीच हुई राजनीतिक सहमति को पहले ही थोड़ी शंका के साथ देखा जा रहा था क्योंकि मधेशी और माओवादियों में ज़ोरदार राजनीतिक शत्रुता रही है. जोड़तोड़ मधेशियों और माओवादियों के बीच हुई इस खटपट के बाद नेपाली कांग्रेस, यूनाइटेड मार्क्सवादी-लेनिनवादी (यूमाले) ने मधेशी पार्टियों से बातचीत शुरू कर दी है.
अगर नेपाली कांग्रेस, यूमाले और मधेशी एक साथ आ जाएँ तो वो राष्ट्रपति पद पर अपना उम्मीदवार बैठाने का संख्याबल रखते हैं. नेपाली कांग्रेस ने अपने वरिष्ठ नेता रामबरन यादव को और यूमाले ने रामप्रीत पासवान को मैदान में उतारा है, ये दोनों भी भारतीय मूल के नेता हैं जिनका संबंध उत्तर प्रदेश-बिहार की सीमा से लगे दक्षिणी नेपाल से है. अगर इन तीनों पक्षों में समझौता हो जाता है तो दो में से एक उम्मीदवार को मैदान से हटना होगा. मधेशी पार्टियाँ अपनी एक ही माँग पर डटी हैं कि उनके उम्मीदवार परमानंद झा को उप राष्ट्रपति बनाया जाए. माओवादियों और मधेशियों के बीच बातचीत का सिलसिला अभी टूटा नहीं है जबकि दूसरी ओर मधेशियों ने बातचीत का सिलसिला दो अन्य बड़ी पार्टियों के साथ शुरू कर दिया है जिससे स्थिति बहुत दिलचस्प और पेचीदा हो गई है. | इससे जुड़ी ख़बरें माओवादी शामिल होंगे सरकार में31 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस राजशाही के भविष्य पर अहम बहस शुरू11 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस माओवादी मंत्रिमंडल में शामिल हुए31 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस प्रचंड ने राष्ट्रपति बनने की इच्छा जताई24 अप्रैल, 2008 | भारत और पड़ोस अमरीका का माओवादियों से संपर्क 02 मई, 2008 | भारत और पड़ोस नेपाल में माओवादी मंत्रियों के इस्तीफ़े12 जून, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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