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'नारायणहिती' छोड़कर 'नागार्जुन महल' गए ज्ञानेंद्र | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल में सत्ता से बेदख़ल किए गए राजा ज्ञानेंद्र ने बुधवार को शाही महल नारायणहिती को छोड़कर काठमांडू के बाहरी इलाक़े में अपने निजी आवास नागार्जुन में रहने चले गए है. राज परिवार नारायणहिती महल में पिछले लगभग दो सौ सालों से रह रहा था. राजा ज्ञानेंद्र काले रंग की एक मर्सिडीज़ कार में सवार होकर अपनी पत्नी कोमल के साथ नारायणहिती से बाहर निकले. इस दौरान महल के मुख्य गेट पर पुलिस के सैकड़ों जवान तैनात किए गए थे. इस दृश्य को देखने के लिए वहाँ सैकड़ों की संख्या में लोग मौज़ूद थे. इसमें से कुछ लोग राजशाही के समर्थक भी थे. इन लोगों ने पूर्व राजा से महल न छोड़ने का अनुरोध भी किया. पिछले महीने नेपाल में संविधानसभा की पहली बैठक के बाद माओवादियों ने राजा को महल छोड़ने के लिए पंद्रह दिन का समय दिया था. नया नेपाल पूर्व राजा ज्ञानेंद्र को महल छोड़ते हुए देखने के लिए काठमांडू आए एक किसान देवेंद्र महाराजन ने समाचार एजेंसी एपी से कहा कि 'यह एक नए नेपाल की शुरुआत है और राजतंत्र का अंत हो रहा है, जिसने देश के लिए कुछ किया तो नहीं लेकिन नुक़सान बहुत पहुँचाया.' इससे पहले नारायणहिती में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में ज्ञानेंद्र ने कहा था कि शाही महल छोड़ने के बाद वह देश छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे और देश में ही रहकर आम लोगों की भलाई के लिए काम करेंगे. महल छोड़ने से पहले राजा ज्ञानेंद्र ने कहा है, "देश छोड़ने का मेरा कोई इरादा नहीं है और देश में रहकर ही नेपाली राष्ट्र की स्वतंत्रता और समृद्धि के लिए काम करना है." संवाददाता सम्मेलन में पूर्व राजा ज्ञानेंद्र ने कहा कि उन्होंने अपना ताज और अन्य शाही सामान नेपाल सरकार को सौंप दिया है. उन्होंने कहा, "अगर अतीत में मेरे या मेरे परिवार की किसी गतिविधि से किसी को कोई नुक़सान पहुँचा हो या किसी के अधिकारों का उल्लंघन हुआ हो तो हमें उम्मीद है कि सब इस वास्तविकता को समझने की कोशिश करेंगे कि ऐसा अनजाने में हुआ होगा." पूर्व राजा ज्ञानेंद्र ने संवाददाता सम्मेलन में एक लिखित बयान पढ़ते हुए कहा कि शाही महल में जून 2001 में हुआ नरसंहार उनके और उनकी परिवार की छवि के लिए बहुत ही विध्वंसकारी रहा है और उनके ख़ुद के शरीर और उनकी पत्नी और पूर्व रानी कोमल के शरीर में अब भी गोलियों के छर्रे मौजूद हैं. 18वीं सदी में नेपाली राजशाही की स्थापना करने वाले राजा पृथ्वी नारायण शाह के योगदान का ज़िक्र करते हुए कहा, "राजशाही हमेशा ही नेपाली लोगों की दोस्त बनकर रही है और हम ख़ुद भी नेपाली लोगों की भलाई चाहते थे."
पूर्व राजा ज्ञानेंद्र ने इन दावों का खंडन किया कि उन्होंने अपनी कुछ संपत्ति विदेशों में रखी हुई है. पूर्व राजा ने कहा कि उनकी जो भी कुछ संपत्ति है वह नेपाल में ही है. राजशाही का उन्मूलन पिछले महीने की 12 तारीख़ को नेपाल की नव निर्वाचित संविधान सभा ने नेपाल को गणतंत्र घोषित किया था और नेपाल में लगभग 240 साल तक चले शाह राजवंश का शासन अंत हो गया था. नेपाल के गृहमंत्री कृष्ण प्रसाद सितौला के मुताबिक़ पूर्व नरेश अपने साथ क्या-क्या ले गए और क्या-क्या महल में रह गया, इसकी जानकारी बाद में सार्वजनिक की जाएगी. माओवादी नेता पहले ही कह चुके हैं कि शाही महल को एक संग्रहालय में तब्दील कर दिया जाएगा. नेपाल के समाचार पत्रों में ख़बर है कि पूर्व राजा ज्ञानेंद्र की सौतेली माँ और उनकी दादी को मध्य काठमांडू के राजमहल परिसर में रहने दिया जाएगा लेकिन इस जगह और मुख्य महल के बीच बाड़ लगा दी जाएगी. | इससे जुड़ी ख़बरें गणतांत्रिक नेपाल में जश्न का माहौल29 मई, 2008 | भारत और पड़ोस नेपाली राजशाही का इतिहास28 मई, 2008 | भारत और पड़ोस राजशाही ख़त्म, गणतंत्र बना नेपाल28 मई, 2008 | भारत और पड़ोस माओवादियों को भारी बढ़त13 अप्रैल, 2008 | भारत और पड़ोस सुरक्षा व्यवस्था पर बौद्ध धर्मगुरु की चिंता25 अप्रैल, 2008 | भारत और पड़ोस नेपाल चुनावों में माओवादियों को बढ़त12 अप्रैल, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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