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सुरक्षा व्यवस्था पर बौद्ध धर्मगुरु की चिंता | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल में एवरेस्ट क्षेत्र के एक धार्मिक नेता ने ओलंपिक मशाल की एवरेस्ट यात्रा के लिए नेपाल में की गई सुरक्षा तैयारियों की तीख़ी आलोचना की है. तेंगबोछे मठ के रिनपोछे गवाँग तेनज़िन जैंगपो ने बीबीसी से कहा कि मशाल आने से पहले ही नेपाल सरकार एहतियाती क़दम उठाने में बहुत आगे निकल गई है. तेंगबोछे मठ के रिनपोछे जैंगपो वह शख़्स हैं जिनसे नेपाल या दूसरे देशों के पर्वतारोही इस क्षेत्र में चढ़ाई शुरू करने से पहले पारंपरिक रूप से बौद्ध परंपरा के अनुसार आशीर्वाद लेते हैं. नेपाल ने कहा है कि मशाल की एवरेस्ट यात्रा के दौरान वह चीन विरोधी प्रदर्शनों के साथ सख़्ती से पेश आएगा. काठमांडू से बीबीसी संवाददाता चार्ल्स हैवीलैंड का कहना है कि चीन से अपने संबधों को किसी तरह के नुक़सान से बचाने के लिए चीन ने प्रदर्शनों को रोकने का मन बना लिया है. 'गोली चलाने की अनुमति' उन्होंने कहा कि एवरेस्ट क्षेत्र 'शांति का इलाक़ा' है लेकिन मशाल यात्रा के लिए इस क्षेत्र में हथियारों के साथ सुरक्षा बलों को भेजने से वे हैरान हैं.
जैंगपो ने कहा, "गृह मंत्रालय ने भारी संख्या में सेना और पुलिस के सशस्त्र जवानों को भेजा है और उन्हें गोली चलाने की अनुमति भी दी गई है." वे कहते हैं, "दुनिया की सबसे ऊँची चोटी वाले इस शांत देश में सरकार बंदूकों की बात कर रही है जिससे मैं चकित और दुखी हूँ." बदलते घटनाक्रमों से चिंतित जैंगपो कहते हैं, "हो सकता है कि चीन के दबाव में ऐसा हो रहा हो...या हो सकता है कि हमारी सरकार, हमारा देश ही ऐसा करना चाहता हो." नेपाल का कहना है कि पहाड़ पर सामानों की जाँच जैसे सुरक्षा के उपाय ज़रूरी हैं. बुधवार को एक अमरीकी के पास से तिब्बत समर्थक झंडा मिलने के बाद एवरेस्ट चढ़ाई के बेस केंप से उन्हें वापस लौटा दिया गया. इस तरह की चीज़ों पर सागरमाथा (एवरेस्ट) राष्ट्रीय पार्क में प्रतिबंध है. 'अमरीका करे निगरानी'
नेपाल ने 10 मई से पहले तक कैमरा या दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को आधार केंद्र से ऊपर ले जाने से रोकने के लिए नियम बना दिए हैं. जैंगपो कहते हैं कि ऐसा लगता है कि तिब्बत समर्थक पहाड़ की चोटी तक पहुँच ही नहीं पाएँगे. उनका कहना है, "मेरे विचार है कि अमरीका को इस मसले को देखना चाहिए और अगर अशांति या गोली चलने का ख़तरा हो तो उसे एवरेस्ट क्षेत्र की निगरानी करनी चाहिए." मशाल यात्रा की संवेदनशीलता को देखते हुए एवरेस्ट के दक्षिणी हिस्से में नेपाली सेना और पुलिस की ज़बर्दस्त तैनाती की गई है. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि नेपाल अपने पड़ोसी देश चीन को नाराज़ नहीं करना चाहता है जिस पर वह कूटनीतिक और दूसरी मदद के लिए वह निर्भर है. |
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