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ओलंपिक रिले बिना बाधा के संपन्न | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बाधाओं, रुकावटों की तमाम आशंकाओं को ख़त्म करते हुए दिल्ली के राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक ओलंपिक मशाल की यात्रा बिना किसी बाधा के संपन्न हो गई है. ओलंपिक रिले के मद्देनज़र दिल्ली के राजपथ पर परिंदा पर भी न मार सके.. जैसी किलेबंदी और हज़ारों की तादाद में सुरक्षा बल तैनात किए गए थे. राजपथ के आसपास आम लोगों और किसी भी अपरिचित व्यक्ति के आने-जाने पर पूरी तरह से रोक थी. चीन और भारत के प्रतिनिधियों और सुरक्षा कमांडो के दस्ते से घिरे हुए भारतीय रिले धावक मशाल को लेकर राजपथ पर आगे बढ़े. 72 सेंटीमीटर लंबी और 985 ग्राम वज़नी यह मशाल दिल्ली में 47 खिलाडि़यों समेत 70 हस्तियों के हाथों से होती हुई इंडिया गेट पहुंची. मशाल रिले में खिलाड़ी मिल्खा सिंह, पीटी ऊषा, कर्णम मल्लेश्वरी जैसे बड़े नामों के साथ ही अभिनेता सैफ़ अली ख़ान, आमिर ख़ान ने भी हिस्सा लिया. मंच पर नहीं आए आमिर टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस और महेश भूपति ने एकसाथ ओलंपिक मशाल से इंडिया गेट पर रखी मशाल को प्रज्वलित किया.
ओलंपिक मशाल के इंडिया गेट पहुंचने पर भारतीय ओलंपिक संघ के प्रमुख सुरेश कल्माड़ी ने कहा कि भारत में बिना किसी बाधा के ओलंपिक मशाल की रिले संपन्न होने पर वो सभी प्रतिभागियों को धन्यवाद देना चाहते हैं. उन्होंने इस मौके पर कई राजनीतिक और खेल जगत के अतिथियों को लोगों से परिचित कराया. इस कड़ी में जब आमिर ख़ान का नाम मंच से लिया गया तो आमिर मंच पर नहीं आए. हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि मशाल लेकर दौड़ने वाले आमिर आखिर मंच पर क्यों नहीं आए. मशाल रिले राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक यानी लगभग दो किलोमीटर दूरी की हो रही है. दिल्ली में राजपथ और उससे जुड़ी आसपास की सड़कों को दोपहर एक बजे से शाम सात बजे तक के लिए बंद करने के आदेश दिए गए हैं. विरोध उधर मशाल के विरोध के स्वर भी बुधवार से ही लगातार सुनाई दे रहे हैं. गुरुवार को तिब्बत समर्थकों ने प्रदर्शन रैली निकालकर अपना विरोध दर्ज कराया. इस मशाल की रिले से पहले ही तिब्बतियों ने विरोध स्वरूप एक अलग मशाल रैली दिल्ली में महात्मा गांधी की समाधि से जंतर-मंतर तक निकाली.
इस रैली को दिल्ली के कई मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों, दुनिया के दूसरे हिस्से से आए तिब्बत समर्थकों और कई ग़ैर-राजनीतिक, ग़ैर-सरकारी संगठनों का समर्थन भी मिला. इस प्रदर्शनों में हिस्सा ले रहे लोग चीन विरोधी नारे लगा रहे थे और भारत सरकार से गुहार कर रहे थे कि भारत ओलंपिक खेलों का बहिष्कार करे. दिल्ली में ऐसे प्रदर्शनों के मद्देनज़र ही राजपथ के आसपास स्थित सरकारी दफ़्तरों में काम करे रहे कर्मचारियों को इन छह घंटों के दौरान बाहर निकलने की इजाज़त नहीं मिली. यहां तक कि राजपथ की तरफ खुलने वाली खिड़कियों को भी बंद रखने को कहा गया. राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड के जवान दौड़ के रास्ते से लगी ऊंची इमारतों पर तैनात रहे. |
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