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अब बीमारियों की रोकथाम पर ज़ोर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बिहार के बाढ़ प्रभावित कोसी मंडल के मधेपुरा, सहरसा, अररिया, पूर्णिया और सुपौल ज़िले में बाढ़ का असर कुछ कम हुआ है. प्रशासन को पूरा ध्यान अब बाढ़ का पानी हटने के बाद पानी से होने वाली बीमारियों की रोकथाम पर है. राज्य में अभी भी दो हज़ार नौकाएँ और सेना की 35 टुकड़ियाँ राहत और बचाव कार्य में लगी हुई हैं. सरकारी आँकड़ों के अनुसार बाढ़ से अब तक 96 लोगों की मौत हुई है. मधेपुरा ज़िले के मुरलीगंज और कुमार खंड के कई गाँवों में अभी भी बहुत से लोग बाढ़ में फँसे हुए हैं. उन्हें अभी तक निकाला नहीं जा सका है. इन इलाक़ों के क़रीब सभी गाँव बाढ़ से तबाह हो चुके हैं. कोसी मंडल के आयुक्त एचसी सीरोही ने बताया कि बाढ़ प्रभावित इलाक़ों में पानी कम होने के बाद अब हमारा ध्यान गंदे पानी से होने वाली बीमारियों की रोकथाम पर है. बाहर के डॉक्टर उन्होंने बताया कि इस समय बाढ़ प्रभावित सहरसा ज़िले में बिहार सरकार के डॉक्टरों के अलावा क़रीब सौ डॉक्टर बाहर से आकर राहत कार्य में सहयोग कर रहे हैं. बाढ़ का पानी हटने के बाद से कई इलाक़ों में डायरिया फैलने की ख़बरें मिल रही हैं. मंडलायुक्त सीरोही ने बताया, "हमारे पास दवा की कमी नहीं है. सभी दवाएँ पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं. उन्होंने कहा कि पहले डॉक्टरों की कमी थी, जो राहत कार्य में सहयोग करने अन्य राज्यों से आए डॉक्टरों से पूरी हो गई है." मंडलायुक्त ने कोसी मंडल में कहीं भी महामारी फैलने की ख़बर से इनकार किया. पिछले कुछ दिनों में प्रभावित इलाक़ों में बाढ़ के पानी के स्तर कम हुआ है. इसे देखते हुए अब राज्य सरकार ने यह फ़ैसला किया है कि बाढ़ प्रभावित इलाक़ों में खाने के पैकेट अब हेलिकॉप्टर से नहीं गिराए जाएँगे. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरुवार को बाढ़ प्रभावित पूर्णिया ज़िले का दौरा कर वहाँ की स्थिति का जायज़ा लिया. वहीं मुख्यमंत्री बाढ़ राहत कोष में सहयोग देने का सिलसिला अभी भी जारी है. सरकार के मुताबिक़ इस कोष में अब तक सरकारी और ग़ैर सरकारी संगठनों की ओर से दिए गए क़रीब 75 करोड़ रुपए के चेक जमा हो चुके हैं. इस राशि में मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज की ओर से दी गई 11 करोड़ रुपए की सहायता भी शामिल हैं. बिहार के आपदा प्रबंधन विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक़ बाढ़ पीड़ित लोगों के लिए राज्य में 354 राहत शिविर चलाए जा रहे हैं. इनमें से 351 राहत शिविर अकेले कोसी मंडल के ज़िलों में लगाए गए हैं. इन राहत शिविरों में बाढ़ पीड़ितों के रहने, खाने और दवाओं का इंतज़ाम किया गया है.
क़रीब इतने ही राहत शिविर ग़ैर सरकारी संगठन भी चला रहे हैं. कोसी मंडल के सहरसा, मधेपुरा और सुपौल ज़िलें में राज्य सरकार ने आठ मेगा राहत शिविर बनाए हैं. मेगा शिविरों में 28 हज़ार से अधिक बाढ़ पीड़ित शरण लिए हुए हैं. विभाग के अनुसार राज्य के 2353 गाँवों की चालीस लाख से अधिक की आबादी बाढ़ से प्रभावित है. इसमें कोसी मंडल के 984 गाँव और 29 लाख से अधिक की आबादी शामिल है. बाढ़ के पानी से तीन लाख सत्रह हज़ार कच्चे-पक्के मकान ध्वस्त हुए हैं. चार लाख सैतीस हज़ार हेक्टेयर क्षेत्र में बाढ़ का पानी फैला हुआ है. |
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