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प्रचंड के एजेंडा में कोसी सबसे ऊपर | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल की माओवादी सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री ने कहा है कि नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री प्रचंड लाखों लोगों को बेघर करने वाली कोसी नदी की बाढ़ का दीर्घकालिक समाधान निकालने का प्रयास करेंगे. नेपाल के विदेश मंत्री उपेंद्र यादव ने कहा है कि अगले सप्ताह अपनी भारत यात्रा के दौरान नेपाल के प्रधानमंत्री के "एजेंडा पर कोसी की बाढ़ का हल निकालना सबसे ऊपर होगा". कोसी नदी के पानी को नियंत्रित करने के लिए भारत और नेपाल के बीच दशकों पुराना समझौता है. कोसी नदी में आई बाढ़ के लिए दोनों देश एक-दूसरे को दोषी ठहराते हैं और जानकारों का कहना रहा है कोसी नदी में इससे भी भयंकर बाढ़ आ सकती है. एक दूसरे पर आरोप लगाने के बावजूद दोनों देशों के अधिकारी मानते हैं कि कोसी नदी के पानी को काबू में रखने के लिए मिलकर ही प्रयास करने होंगे. कुछ ही दिन पहले भारत की यात्रा करने वाले उपेंद्र यादव ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री प्रचंड भारतीय नेताओं से इसी पर विस्तार से विचार करेंगे. उन्होंने कहा, "हमें नई व्यवस्था बनानी होगी क्योंकि हाल की बाढ़ ने यह साबित कर दिया है कि मौजूदा व्यवस्था कारगर नहीं है." नेपाली विदेश मंत्री ने कहा, "यह एक ज्वलंत समस्या है, प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान इससे निबटने के लिए बनाई जाने वाली व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा होगी. हालाँकि पहले बिहार सरकार इसमें शामिल रही थी लेकिन अब केंद्र सरकार इस दिशा में सक्रियता दिखा रही है." अधिकारी गंभीर उपेंद्र यादव ने कहा कि भारत की हाल की यात्रा के दौरान उन्होंने महसूस किया कि केंद्र सरकार के अधिकारी कोसी की समस्या को बहुत गंभीरता से ले रहे हैं और उसे सुलझाने में नेपाल का सहयोग चाहते हैं. कोसी नदी अपने साथ बहुत अधिक सिल्ट (मिट्टी) लेकर चलती है और गंगा नदी में जाकर मिलती है, कोसी में अक्सर बाढ़ आने के कारण इसे 'बिहार का शोक' कहा जाता है. नेपाल स्थित कोसी नदी का तटबंध टूट जाने के कारण बिहार के लाखों लोग भीषण बाढ़ की चपेट में आ गए हैं. भारत और नेपाल के बीच हुए समझौते के तहत कोसी नदी के तटबंध के निर्माण और रख-रखाव की ज़िम्मेदारी भारत की है. जानकारों का कहना है कि कोसी नदी का तटबंध कई स्थानों पर कमज़ोर हो गया है जिसकी वजह से भयानक बाढ़ का ख़तरा हमेशा बना रहेगा इसलिए कोई नई व्यवस्था बनाने की ज़रूरत है जो दोनों के लिए एक बड़ी चुनौती होगी. |
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