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कश्मीरः गीलानी रिहा, शब्बीर को जेल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कश्मीर घाटी वाले क्षेत्र में सोमवार को नौंवे दिन भी कर्फ़्यू जारी है. सोमवार को देर शाम अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गीलानी को रिहा कर दिया गया. इसके कुछ देर बाद ही मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़ और यासीन मलिक को भी रिहा कर दिया गया. इन अलगाववादी नेताओं को आठ दिन पहले राजधानी श्रीनगर के लाल चौक पर रैली से पहले हिरासत में ले लिया गया था. उधर घाटी के एक प्रमुख अलगाववादी नेता शब्बीर शाह को जन सुरक्षा क़ानून (पीएसए) के तहत जेल भेज दिया गया है. इस क़ानून के तहत किसी को बिना मुक़दमा चलाए ही दो साल तक जेल में रखा जा सकता है. हालांकि कुछ जगहों पर कर्फ़्यू में ढील दी गई थी पर रविवार को राज्य सरकार और अमरनाथ मंदिर बोर्ड के बीच हुए समझौते का तीव्र विरोध घाटी में शुरू हो गया था इसलिए घाटी क्षेत्र में कर्फ़्यू और प्रभावी कर दिया गया है. रविवार को राज्य सरकार और अमरनाथ मंदिर बोर्ड के बीच समझौता हुआ था जिसके तहत बोर्ड को जंगल की सौ एकड़ ज़मीन इस्तेमाल करने की इजाज़त दे दी गई थी. राज्य सरकार के इस निर्णय पर घाटी में व्याप्त असंतोष को देखते हुए अधिकारियों ने कुछ स्थानों को छोड़कर कर्फ़्यू में कोई ढील नहीं देने का निर्णय किया है. श्रीनगर, कूपवाड़ा और सोपोर में रविवार को ढील दी गई थी. लेकिन ढील के वक़्त वहाँ हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों की वजह से अधिकारियों को ढील को ख़त्म कर फिर कर्फ़्यू लागू करना पड़ा.
सरकार जंगल की इस ज़मीन को अमरनाथ श्राइन बोर्ड को विशेष रूप से अमरनाथ यात्रा के दौरान इस्तेमाल के लिए देने पर राज़ी हो गई. लेकिन अधिकारियों ने इस बात पर ज़ोर दिया कि ज़मीन के मालिकाना हक में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा. लेकिन प्रमुख कश्मीरी व्यापारी मुश्ताक़ सागर कहते हैं कि सरकार शब्दों के अर्थ में हेरफेर कर रही है. उन्होंने कहा, "हम जानते हैं कि अस्थाई का अर्थ क्या होता है. राज्य के अस्थाई रूप से भारत के पास जाने के वक़्त भारतीय सेना भी कश्मीर में अस्थाई रूप से ही आई थी लेकिन तब से वह वापस नहीं गई." ग़िरफ़्तारी और क़ैद उधर प्रमुख अलगाववादी नेता शब्बीर शाह को जन सुरक्षा क़ानून के तहत दो साल के लिए जेल भेज दिया गया है. उन्हें पिछले दिनों ग़िरफ़्तार किया गया था. एक और नेता मोहम्मद अशरफ़ सेहराई को भी जनसुरक्षा क़ानून के तहत ग़िरफ़्तार करके जेल भेजना तय हो चुका है. इस क़ानून में बिना मुक़दमा चलाए ही दो साल की क़ैद का प्रावधान है. इससे पहले इस्लामिक संगठन दुख़्तराने मिल्लत की प्रमुख आसिया अंदराबी को भी इसी क़ानून के तहत ग़िरफ़्तार किया गया था. इन सभी नेताओं पर ऐसी कार्यों में लगे होने का आरोप है जो देश के हित में नहीं है. शब्बीर शाह और आसिया अंद्राबी प्रमुख अलगाववादी नेताओं में से हैं. घाटी में पिछले दिनों उग्र प्रदर्शनों के बाद कई प्रमुख अलगाववादी नेताओं को हिरासत में ले लिया गया था. गुस्सा और निराशा एक युवा राहिल शेख़ कहते हैं, "हमारे ख़ून का कोई मूल्य नहीं है, सब बेकार हो गया. ज़मीन के इस विवाद में कितने कश्मीरी युवा मारे गए लेकिन अब सब बर्बाद हो गया." राहिल ने कहा, "हमारा ख़ून तो पानी से भी सस्ता है. लेकिन हमारा संघर्ष जारी रहेगा. हम हार नहीं मानेंगे." एक पत्रकार खुर्शीद वानी कहते हैं कि अमरनाथ ज़मीन विवाद दरअसल भारत की कांग्रेस सरकार और हिंदू राष्ट्रवादी पार्टी भारतीय जनता पार्टी के बीच की खींचतान है. दोनों इस विवाद के ज़रिए एक-दूसरे को नीचा दिखाना चाहते हैं और दोनों ही दलों की निग़ाह आने वाले संसदीय चुनावों पर है. उन्होंने कहा, "कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी दोनों ही जीत गईं लेकिन मैं समझता हूँ कि भारत हार गया. क्योंकि कश्मीरियों को यह सोचने को मजबूर किया जा रहा है कि वे भारत का ही हिस्सा हैं." |
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