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अमरनाथ ज़मीन विवाद पर समझौता | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जम्मू कश्मीर में अमरनाथ संघर्ष समिति और राज्य सरकार के बीच अमरनाथ यात्रा के लिए ज़मीन को लेकर चल रहे विवाद पर सहमति के साथ समिति ने आंदोलन वापस लेने की घोषणा की है. दोनों पक्षों के बीच समझौते के तहत श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड को कश्मीर घाटी में अमरनाथ यात्रा के दौरान 40 हेक्टेयर ज़मीन दी जाएगी लेकिन इस पर श्राइन बोर्ड का मालिकाना हक नहीं होगा. उल्लेखनीय है कि अमरनाथ ज़मीन विवाद के कारण पिछले क़रीब दो महीने से जम्मू और कश्मीर में अलग अलग प्रतिस्पर्धी विरोध प्रदर्शन हो रहे थे जिसमें कई लोग मारे गए. इस विवाद के निपटारे के लिए राज्यपाल एनएन वोहरा ने चार सदस्यीय समिति बनाई ती जो अमरनाथ यात्रा संघर्ष समिति ( एवाईएसएस) के सदस्यों से बात कर रही थी. बातचीत में एवाईएसएस ने 15 मांगें रखी थीं जिसमें से कई मांगों को सरकार ने मान लिया है. रविवार की सुबह क़रीब साढ़े चार बजे दोनों पक्षों ने समझौते पर हस्ताक्षर किए. इस समझौते के तहत, '' राज्य सरकार अमरनाथ यात्रा के दौरान 40 हेक्टेयर ज़मीन श्राइन बोर्ड को दे देगी लेकिन इस दौरान इसके मालिकाना हक में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा.'' दोनों पक्षों के बीच बातचीत में शब्दों पर सहमति नहीं बन रही थी. सरकार श्राइन बोर्ड को यह ज़मीन ''यात्रा के दौरान इस्तेमाल'' के लिए देना चाहती थी जबकि बोर्ड चाहता था कि उसे ''ज़मीन पर बिना मालिकाना हक में बदलाव की शर्त के साथ सभी प्रकार के हक '' दिए जाएं. बोर्ड की शर्त मान लिए जाने के साथ ही अमरनाथ यात्रा संघर्ष समिति ने आंदोलन वापस ले लिया है. एवाईएसएस के संयोजक लीला करण शर्मा ने कहा, ' बोर्ड को ज़मीन दिए जाने के बाद उसे निरस्त किया गया था लेकिन अब हमें उससे बेहतर शर्तों पर ज़मीन मिल जाएगी और इसके पैसे भी नहीं देने पड़ेंगे.' इसके अलावा एवाईएसएस की इस मांग को सरकार की ओर से समर्थन मिला कि श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड का पुनर्गठन हो और इसे मज़बूत किया जाए. एवाईएसएस के कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ छोटे आरोपों को वापस लेने और बड़े आरोपों पर विचार के लिए नोडल अधिकारी की नियुक्त पर भी सहमति बनी है. इतना ही नहीं एक समिति पिछले दो महीने में व्यवसाय को हुए नुकसान का आकलन करेगी और भारत सरकार को मुआवजे के लिए रिपोर्ट भेजेगी. इस समझौते के बाद जम्मू में सुबह के समय बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर आए और अपनी खुशी व्यक्त की. फिलहाल इस समझौते पर कश्मीर घाटी से राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया नहीं आई है. इनकी प्रतिक्रिया इसलिए मायने रखती है क्योंकि जब सरकार ने दस जुलाई को श्राइन बोर्ड को ज़मीन देने का फ़ैसला किया था तो कश्मीर में इसके विरोध में प्रदर्शन हुए थे जिसके बाद सरकार ने ज़मीन वापस लेने का फ़ैसला किया. इस फ़ैसले के विरोध में अमरनाथ यात्रा संघर्ष समिति का गठन हुआ और फिर जम्मू और कश्मीर में अलग अलग प्रतिस्पर्धी प्रदर्शन हो रहे थे. |
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