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सूरत मामले की गुत्थी सुलझाने का दावा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
गुजरात पुलिस ने दावा किया है कि जुलाई महीने में सूरत में मिले 22 ज़िदा बमों की गुत्थी उन्होंने सुलझा ली है. गुजरात के पुलिस महानिरीक्षक पीसी पांडे ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अहमदाबाद में हुए बम धमाकों और सूरत में मिले ज़िदा बम के तार आपस में जुड़े हुए हैं. पुलिस महानिरीक्षक ने कहा, "अहमदाबाद के गुनाहकारों का सूरत मामले के साथ सीधा संपर्क और संबंध हैं." उन्होंने कहा, ''यह समय 'मीडिया ट्रायल' का नहीं है और वे मीडिया से कुछ भी नहीं छिपा रहे हैं.'' पूछताछ जारी अहमदाबाद बम धमाकों के सिलसिले में गिरफ़्तार अबू बशर का नाम लेते हुए पीसी पांडे का कहना था कि सूरत में बम रखने और बनाने में उनका सहयोग था. ये पूछे जाने पर कि सूरत में रखे एक भी बम नहीं फूटा, इसका जवाब देते हुए पांडे ने कहा कि यह ख़ुशकिस्मती थी कि वे बम नहीं फूटे. पुलिस महानिरीक्षक ने कहा कि बेगुनाहों को सज़ा देने की नीयत गुजरात पुलिस की नहीं है, वह उस अपराध की तह तक पहुँचना चाहते है जिसने कई निर्दोषों की जान ली. उन्होंने कहा कि पुलिस गिरफ़्तार किए गए लोगों से पूछताछ कर रही है जिसका विस्तृत ब्यौरा अभी नहीं दिया जा सकता है. पुख्ता जाँच करने के बाद वे इसे मीडिया के सामने लाएँगे. |
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